बाबुल सुप्रियो बोले- मैं वहीं हूं जहां हूं, TMC छोड़ने की खबरें बेबुनियाद

पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और नेताओं के पलायन का सिलसिला लगातार जारी है। इसी बीच मंगलवार को टीएमसी के राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की, जिनमें उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापसी की चर्चा चल रही थी।
55 वर्षीय पूर्व गायक और नेता सुप्रियो ने कहा कि वह लगातार मीडिया कॉल्स से परेशान हैं, जिनमें उनसे उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल पूछे जाते हैं। उन्होंने साफ कहा, “मैं वहीं हूं जहां हूं, अपनी पार्टी और अपने नेता के साथ।”
हालांकि अपने बयान में उन्होंने भाजपा की चुनावी जीत को भी स्वीकार किया, जो टीएमसी नेतृत्व के रुख से अलग माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान देंगे और सांसद निधि का उपयोग जनहित में करेंगे।
पुरानी राजनीतिक यादों का जिक्र
सुप्रियो ने अपनी पोस्ट में पुराने अनुभवों का भी उल्लेख किया, जिसमें 2015 के एक विवादित ‘झालमुड़ी एपिसोड’ का जिक्र था। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी के भीतर ही उन्हें आलोचनाओं और कटाक्षों का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने आसनसोल से लोकसभा चुनाव जीतकर क्षेत्र में विकास कार्य किए और कई लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।
दल-बदल की अटकलों पर तंज
टीएमसी में जारी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं पर तंज कसते हुए सुप्रियो ने कहा कि उन्हें यह “दिलचस्प और हास्यास्पद” लगता है कि चुनावी हार के बाद कुछ लोग नई राजनीतिक दिशा तलाश रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फिलहाल किसी अन्य दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है और वे अपनी वर्तमान भूमिका में ही कार्य करते रहेंगे।
भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए सुप्रियो ने कहा कि जो भी व्यक्ति जनता के धन का दुरुपयोग करता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी के खिलाफ राय व्यक्त की।
टीएमसी में बढ़ता संकट
गौरतलब है कि हालिया चुनावों के बाद टीएमसी में नेतृत्व संकट और अंदरूनी कलह की स्थिति बनी हुई है। पार्टी को कई वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों और असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले समय में और भी नेता पार्टी से दूरी बना सकते हैं, जिससे बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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