दीपू हत्याकांड: सुवेंदु अधिकारी ने पिता से की बातचीत, सहायता का एलान

बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू मजदूर की भीड़ हिंसा में मौत का मामला सामने आने के बाद दोनों देशों में गंभीर चिंता जताई जा रही है। घटना को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और मानवाधिकार स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मृतक के परिजनों से फोन पर बातचीत कर दुख प्रकट किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मृतक के पिता राबिलाल चंद्र दास के अनुसार, उन्हें बेटे की मौत की सूचना सबसे पहले सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। बाद में रिश्तेदारों ने बताया कि दीपु को कथित रूप से एक पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया, फिर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। घटना के बाद शव को ढाका-मयमनसिंह राजमार्ग के किनारे फेंक दिया गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित हुआ।
परिवार का आरोप है कि अब तक उन्हें सरकारी स्तर पर कोई ठोस भरोसा या सहायता नहीं मिल पाई है। इस बीच सुवेंदु अधिकारी ने 23 तारीख को मृतक के परिवार को आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सहायता पूरी तरह मानवीय आधार पर होगी और परिवार की जरूरतों को देखते हुए मासिक मदद की व्यवस्था की जाएगी, ताकि रोज़मर्रा के खर्चों में उन्हें सहारा मिल सके।
घटना के बाद बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने कार्रवाई करते हुए सात संदिग्धों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की पहचान कर ली गई है और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अंतरिम सरकार ने भी इस हिंसा की निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि नए बांग्लादेश में इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
इस मामले पर लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे निराधार आरोपों और भीड़ को उकसाने का नतीजा बताया। उनके अनुसार, दीपु एक गरीब मजदूर था और परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन था। उन्होंने आरोप लगाया कि मामूली विवाद को धार्मिक रंग देकर हिंसा भड़काई गई और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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