कल्याण बनर्जी ने ममता के सामने रखी बड़ी शर्त, बोले- मेरे और अभिषेक में किसी एक को चुनें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल के दिनों में राज्यसभा से कई सांसदों के इस्तीफों के बीच अब वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी के बयान ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
अभिषेक बनर्जी को लेकर जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़े एक मामले में कानूनी कार्यवाही के दौरान कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि जिस मामले की पैरवी वह कर रहे थे, उससे संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय और नई याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी उन्हें समय रहते नहीं दी गई।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह मामले की शुरुआत से जुड़े रहे हैं और अदालत में लगातार पक्ष रख रहे थे। उनके अनुसार, बाद में समान विषय पर अलग कानूनी प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी उन्हें अचानक मिली, जिससे वह असहज महसूस कर रहे हैं।
"सम्मान की कमी महसूस हुई"
वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्होंने इस मामले की तैयारी में काफी समय और मेहनत लगाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित सम्मान और संवाद नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन और कानूनी क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने अपनी आपत्ति रखी।
चुनावी हार के बाद बढ़ी बेचैनी
चार मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से तृणमूल कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने अलग-अलग मुद्दों पर असहमति जताई है, जिससे संगठन के भीतर हलचल बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी झटके के बाद पार्टी में नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक बयान पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
पहले भी बागियों पर साध चुके हैं निशाना
दिलचस्प बात यह है कि कल्याण बनर्जी पहले पार्टी छोड़ने या बगावती रुख अपनाने वाले नेताओं की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में ऐसे नेताओं को पार्टी के प्रति वफादार न बताते हुए उन पर तीखे राजनीतिक हमले भी किए थे।
हालिया घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजरें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की अगली रणनीति और पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को संभालने के प्रयासों पर टिकी हुई हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.