अहमदाबाद विमान हादसे की दर्दनाक यादें आज भी ताजा, पूर्व डीजीपी ने साझा किया अनुभव

अहमदाबाद में पिछले साल हुए एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 विमान हादसे को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन इस दर्दनाक त्रासदी की यादें अब भी गुजरात के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक के जेहन में ताजा हैं। उन्होंने इस घटना को अपने पूरे करियर की सबसे दुखद और भावुक कर देने वाली घटना बताया।
डीजीपी मलिक ने कहा कि हादसे के बाद जले हुए शवों की बरामदगी और मलबे से उन्हें निकालने का दृश्य बेहद भयावह था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस कठिन समय में सभी राहत और बचाव एजेंसियों ने जिस तेजी और तालमेल के साथ काम किया, वह एक मिसाल बन गया।
उड़ान भरते ही हुआ था भीषण हादसा
12 जून 2025 को लंदन के लिए रवाना हुई एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और क्रू मेंबर्स सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा आसपास मौजूद एक मेडिकल संस्थान में 19 लोगों की मौत हुई थी। इस त्रासदी में केवल एक यात्री जीवित बच सका था।
मिनटों में शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
तत्कालीन अहमदाबाद पुलिस आयुक्त रहे ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि हादसे की सूचना उन्हें मात्र दो मिनट के भीतर कंट्रोल रूम से मिल गई थी। सूचना मिलते ही वे मौके के लिए रवाना हो गए और दोपहर 2 बजे से पहले घटनास्थल पर पहुंच गए।
उनके अनुसार, 30 मिनट के भीतर 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था। फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य आपात सेवाओं के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए और पूरे क्षेत्र को सील कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई।
डीएनए से हुई पहचान, रिकॉर्ड समय में प्रक्रिया पूरी
प्रशासन की प्राथमिक चुनौती मृतकों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंपना थी। इसके लिए डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई गई।
डीजीपी मलिक ने बताया कि हादसे के कुछ ही घंटों में परिजनों के डीएनए सैंपल एकत्र कर लिए गए थे और तेजी से मिलान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। महज 20 घंटे के भीतर पहला शव परिजनों को सौंप दिया गया, जबकि 50 घंटे से कम समय में डीएनए मिलान के बाद शवों की पहचान पूरी कर ली गई।
परिजनों को तुरंत मिले सभी दस्तावेज
उन्होंने बताया कि परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट, एफआईआर कॉपी, पंचनामा और अन्य जरूरी दस्तावेज मौके पर ही उपलब्ध कराए गए ताकि उन्हें बाद में किसी भी तरह की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी न हो।
करियर की सबसे दर्दनाक घटना
डीजीपी मलिक ने कहा कि सभी एजेंसियों के बीच बेहतरीन समन्वय के बावजूद यह हादसा उनके जीवन की सबसे भावुक और दर्दनाक घटना बना रहेगा, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.