'ऑपरेशन सिंदूर के समय बंकरों में छिपी थी पाक सेना', जरदारी का कबूलनामा

आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोपों से घिरे पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। इस बार चौंकाने वाला खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना बेहद दबाव में थी और हालात ऐसे थे कि सैनिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी।
एक कार्यक्रम के दौरान जरदारी ने बताया कि सैन्य तनाव के समय न सिर्फ सेना, बल्कि उन्हें स्वयं भी सुरक्षा के लिहाज से बंकर में रहने की सलाह दी गई थी। राष्ट्रपति का यह बयान उस समय आया है, जब पाकिस्तान की सेना पहले अपनी ताकत और तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही है। ऐसे में यह स्वीकारोक्ति देश की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।
आर्थिक बदहाली ने बढ़ाई मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरी की ओर इशारा करता है। गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान लंबे समय तक किसी सैन्य टकराव को झेलने की स्थिति में नहीं है। ऐसे हालात में सेना का बंकरों में छिपना यह दर्शाता है कि देश भीतर से कितना असुरक्षित और तनावग्रस्त है।
पहलगाम हमले के बाद भारत का जवाब
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी। इसके जवाब में भारत ने 6 और 7 मई की दरमियानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया।
आतंकी ठिकानों पर सटीक प्रहार
भारतीय सेना ने इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के नौ अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और प्रशिक्षण केंद्र शामिल थे, जहां से भारत के खिलाफ हमलों की साजिशें रची जाती थीं।
तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पहलगाम हमले का दर्द लोगों के दिलों में ताजा है। वहीं, जरदारी का ताजा बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की कार्रवाई ने पाकिस्तान को रणनीतिक और मानसिक दोनों स्तरों पर गहरा असर दिया है।
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