ई20 पेट्रोल पर सियासी घमासान तेज, राहुल गांधी ने केंद्र की नीति पर उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- ई20 पेट्रोल को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।
- राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी।
- कांग्रेस ने माइलेज कम होने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने का दावा किया।
देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ई20 पेट्रोल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर कहा जाता है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन इस मामले में तो पूरी दाल ही काली है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह एक कार के पास खड़े होकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई20 का विषय बेहद गंभीर है। उनके मुताबिक, देश में इस समय भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि कई बड़े मुद्दे प्राथमिकता में हैं। उन्होंने लोगों से चिंता नहीं करने की भी बात कही।
राहुल गांधी ने ई20 पेट्रोल को लेकर क्या कहा?
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि ई20 का मुद्दा काफी बड़ा है और कांग्रेस इसे लेकर जल्द ही अभियान शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस विषय को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा क्योंकि उनके अनुसार ई20 पेट्रोल से लोगों की कारें, मोटरसाइकिलें और स्कूटर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे सीधे तौर पर लोगों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
कांग्रेस के आरोप क्या हैं?
कांग्रेस का कहना है कि ई20 पेट्रोल लागू होने के बाद सस्ता ईंधन उपलब्ध कराने का वादा पूरा नहीं हुआ। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 5 अगस्त को दावा किया था कि मार्च 2025 से देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लगभग केवल ई20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- ई20 पेट्रोल के कारण वाहनों का माइलेज कम हो रहा है।
- इससे उपभोक्ताओं के ईंधन पर होने वाला खर्च बढ़ गया है।
- पार्टी का दावा है कि अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच कम माइलेज की भरपाई में उपभोक्ताओं पर लगभग 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
- कांग्रेस का कहना है कि ई20 पेट्रोल की कीमत घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती थी।
- पार्टी का आरोप है कि इस नीति का सबसे अधिक लाभ इथेनॉल उत्पादकों को मिला है।
केंद्र सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार का लगातार कहना रहा है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है। सरकार के अनुसार इथेनॉल की बढ़ती मांग से किसानों को उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिलता है और देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ता है। सरकार का यह भी मानना है कि यह कार्यक्रम लंबे समय में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभदायक साबित होगा।
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि इस नीति से उपभोक्ताओं को वह आर्थिक लाभ नहीं मिला जिसकी उम्मीद जताई गई थी। पार्टी का कहना है कि यदि माइलेज कम हो रहा है तो ईंधन की कीमत में भी उसी अनुपात में राहत मिलनी चाहिए थी। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि नीति आयोग के इथेनॉल रोडमैप में ई20 ईंधन पर कर और वित्तीय राहत देने की सिफारिश की गई थी। विपक्ष अब इस मुद्दे को जनता से जुड़े एक बड़े आर्थिक विषय के रूप में उठाने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपनी इथेनॉल नीति को ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों से जोड़कर देख रही है।
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