खटोला यहीं बिछेगा !

पांच दशक पूर्व मुजफ्फरनगर गंगनहर कार्यालय में एक सज्जन ड्राफ्ट मैन के पद पर काम करते थे- नाम था धर्मवीर। सरकारी नौकरी के साथ ही कविता का भी शौक था। 'सबरस' उप नाम था। धर्मवीर 'सबरस' हास्य कवि थे और उनके 'दुमदार दोहे' बहुत प्रसिद्ध थे। ये 'दुमदार दोहे' 'देहात' में भी प्रकाशित होते थे। सबरस साहब का एक दोहा बहुत मशहूर हुआ जिसकी दुम थी- 'खटोला यहीं बिछेगा'।
खटोला यहीं बिछेगा - एक मुहावरा बन गया। जब काम किसी तरह न बने तो खटोला बिछाकर बैठ जाओ। भोपा थाना के ग्राम सिकन्दरपुर सीकरी क्षेत्र के ग्रामीण रास्ते में जल भराव से परेशान हैं। सब जगह जाकर जल निकासी की गुहार लगाई, न नेताओं ने सुनी, न अधिकारियों ने। परेशान होकर सड़क पर बह रहे पानी में चारपाई डाल कर बैठ गये। इनकी देखा देखी रतनपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम हुसैनपुर-भनवाड़ा के लोग भी सड़क पर बहते पानी में चारपाई डाल कर बैठ गये हैं।
भोपा क्षेत्र के मोरना कस्बे की सड़कों पर भी पानी बह रहा है। अभी वहां खटोला नहीं बिछा है। हो सकता है सिकन्दरपुर और भनवाड़ा वालों की तरह मोरना वाले भी पानी के ऊपर चारपाई बिछाकर बैठ जाएं। पता नहीं अधिकारी और नेता कब चेतेंगे लेकिन इस चक्कर में किसी न किसी की खाट हो खड़ी होगी ही।
छपते छपते: प्रशासन के आश्वासन पर ग्रामीणों ने पानी से चारपाइयां उठा ली है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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