संयुक्त राष्ट्र को अमेरिकी मदद में भारी कटौती, फंडिंग 2 अरब डॉलर तक सिमटी

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में बड़ी कटौती करते हुए केवल दो अरब डॉलर देने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न मानवीय गतिविधियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि यूएन एजेंसियों को बदलते वैश्विक हालात के अनुसार खुद को ढालना होगा, अन्यथा उनका अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
पहले के मुकाबले बेहद कम सहायता
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में यूएन को हर साल लगभग 17 अरब डॉलर की आर्थिक मदद करता रहा है। इसमें 8 से 10 अरब डॉलर तक की राशि स्वैच्छिक योगदान के रूप में दी जाती थी, जबकि शेष रकम सदस्यता शुल्क और अन्य मदों में शामिल होती थी। मौजूदा घोषणा के तहत दी जाने वाली दो अरब डॉलर की सहायता, पहले के मुकाबले बेहद कम है। अमेरिका के साथ-साथ कई अन्य पश्चिमी देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में कटौती की है।
मानवीय योजनाओं पर पड़ेगा सीधा असर
फंडिंग में आई कमी का असर संयुक्त राष्ट्र की उन योजनाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है, जो पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं। यूएन एजेंसियों को पहले ही अपने खर्च सीमित करने पड़े हैं और कई जगहों पर कर्मचारियों की छंटनी भी की जा चुकी है।
आलोचकों की चेतावनी
अमेरिका के इस फैसले की आलोचना करने वालों का कहना है कि फंडिंग में कमी से दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट गहरा सकता है। इससे लाखों लोग भुखमरी, बीमारियों और विस्थापन जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक मंच पर अमेरिका की सॉफ्ट पावर और नैतिक प्रभाव को भी नुकसान पहुंच सकता है।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की कुल फंडिंग में अमेरिका का योगदान सबसे अधिक रहा है। ऐसे में उसकी ओर से की गई यह कटौती, संगठन के मानवीय अभियानों और राहत कार्यों की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.