मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, छह नागा नागरिकों के शव मिलने से तनाव

इंफाल में मणिपुर एक बार फिर तनाव और हिंसा की चपेट में आ गया है। लंबे समय से लापता छह नागा नागरिकों के शव मिलने के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स की संयुक्त टीम ने करीब 450 जवानों के साथ बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। स्निफर डॉग्स और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से करीब 24 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद बुधवार दोपहर छह शव बरामद किए गए।
13 मई से शुरू हुआ तनाव
यह पूरा मामला 13 मई 2026 को शुरू हुआ था, जब कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र समूहों ने 48 से अधिक लोगों को कथित तौर पर बंधक बना लिया था। इससे पहले कांगपोकपी में तीन चर्च नेताओं की हत्या की घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया था, जो शांति वार्ता से लौट रहे थे।
14 बंधक रिहा, छह का नहीं मिला था सुराग
9 जून को नागा संगठनों ने मानवीय आधार पर 14 कुकी बंधकों को रिहा कर दिया था। यूनाइटेड नागा काउंसिल के अध्यक्ष एन. लोहरो ने उम्मीद जताई थी कि बाकी छह नागा नागरिकों को भी जल्द छोड़ा जाएगा, लेकिन इसके अगले ही दिन उनके शव बरामद हो गए।
सड़क पर विरोध, हाईवे जाम
घटना के विरोध में कोउब्रो रेंज लियांगमेई महिला संघ ने नेशनल हाईवे-2 पर नामडिलोंग गांव के पास धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार पर बंधकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
लगातार जारी तनाव के बीच विभिन्न समूहों द्वारा आर्थिक नाकेबंदी के चलते राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
तीन साल से जारी अशांति
मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। कई गांव, घर, व्यापारिक प्रतिष्ठान और धार्मिक स्थल इस संघर्ष में प्रभावित हुए हैं। केंद्र सरकार ने 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया था, जिसे फरवरी 2026 में हटा लिया गया था।
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