तहसीलों का क्या आलम है !

जनपदों की तहसीलें प्रशासन, राजस्व व्यवस्था की प्राथमिक सुलभ इकाई है। गांव का आम आदमी और किसान पहले तहसील की ओर भागता है, बाद में जिला मुख्यालय की ओर मुख करता है किन्तु ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिले की तहसीलों में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। गत वर्ष रालोद विधायक दल के नेता राजपाल बालियान ने बुढ़ाना तहसील में किसानों का उत्पीड़न तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे और एक महिला उप-जिला अधिकारी के विरुद्ध पत्र लिखा था, जिसकी खूब चर्चा हुई थी। अभी 31 जनवरी, 2026 को पूर्व ब्लॉक प्रमुख विनोद मलिक के नेतृत्व में बुढ़ाना तहसील के सैकड़ों किसानों ने तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था।
इधर मुजफ्फरनगर जिले की खतौली तहसील कार्यालयों तथा न्यायालय तक में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाकर तहसील बार संघ के अध्यक्ष नवीन उपाध्याय के नेतृत्व में अधिवक्तागण एक सप्ताह से कार्य बहिष्कार किये हुए है। उप जिला अधिकारी निकिता शर्मा व अधिवक्ताओं के बीच वार्ता भी बे-नतीजा रही।
गौर तलब है कि तहसीलों की कार्य प्रणाली पर नज़र रखने के लिए राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण-अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व, जिला अधिकारी और कभी-कभी तो राजस्व परिषद के सदस्य एवं अध्यक्ष तक तहसीलों का निरीक्षण करते हैं। इनके अतिरिक्त जिला प्रमुख तहसील दिवसों में नियमित रूप से पहुंचते हैं। मण्डल आयुक्त भी तहसीलों का निरीक्षण करते हैं। सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी किसान अधिकारियों के सम्मुख अपनी शिकायतें एवं परेशानियां उठाते ही हैं।
अतः यह कहा जा सकता है कि उच्च अधिकारियों की निगरानी व मुस्तैदी के बावजूद तहसीलों का हाल बेहाल है, फलस्वरूप न केवल किसानों को वरन जन प्रतिनिधियों को भी तहसीलों में कथित भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने को मजबूर होना पड़ता है।
केवल बुढ़ाना या खतौली तहसीलों की कार्य प्रणाली पर, बल्कि सदर और जानसठ तहसीलों पर भी उंगली उठी है। निःसन्देह इससे शासन की छवि धूमिल होती है लोगों को जो परेशानी व शोषण होता है, उसकी. पीड़ा तो वे ही जानते हैं। ऐसे में जनपद के दोनों मंत्रियों का कर्तव्य बनता है कि वे जिले की चारों तहसीलों की कार्य व्यवस्था सुधारने और जनशिकायतों का निराकरण कराके भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन उपलब्ध करायें।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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