मोदी और योगी क्या लेकर आए !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी विदेश यात्राओं को पूरा कर स्वदेश वापस आ गये। श्री मोदी की यात्रा उस समय संपन्न हुई जब ईरान तथा अमेरिका के बीच भयंकर तनाव की स्थिति है। गाजा पट्टी को लेकर इजरायल भी संकटग्रस्त है और सामरिक समस्याओं से घिरा हुआ है। ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल में न केवल भव्य एवं हार्दिक स्वागत हुआ बल्कि श्री मोदी को इजरायली संसद में बुला कर सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया वरन उन्हें संसद को संबोधित करने का अवसर भी प्रदान किया। इजरायली संसद में दो मिनट तक मोदी-मोदी के नारे लगते रहे। न केवल संसद के अध्यक्ष व सत्तारूढ़ दल के नेता (बेंजामिन नेतन्याहू) ने बल्कि विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने भी श्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। नेतन्याहू ने तो यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी महान नेता और मेरे घनिष्ट मित्र ही नहीं, मेरे भाई है।
इजरायली सांसदों ने श्री मोदी को बड़े ध्यान व गंभीरता से सुना तथा उनको वक्तृता के बीच हर्षध्वनि कर तालियां बजाई। संबोधन के बाद श्री मोदी के साथ सेल्फी लेने की भीड़ लग गई। दो दिवसीय यात्रा के अन्त में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की साझा प्रेस कांफ्रेंस हुई जिसमें बताया गया कि 27 समझौतों एवं ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए हैं जिनमें रक्षा, व्यापार, कृषि, ऊर्जा, साइबर स्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और डिजिटल भुगतान शामिल है। सैन्य प्रौद्योगिकी व सैन्य उपकरणों के समझौतों पर तो पाकिस्तान व चीन के भी कान खड़े हुए। श्री मोदी की इजरायल यात्रा को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में तो हद दर्जे की बौखलाहट देखी गई। यद्यपि घोषित तौर पर भारत-इजरायल के बीच कोई रक्षा समझौता नहीं हुआ किन्तु यह सुनिश्चित है कि यदि होता है तो इजरायल चुप नहीं बैठेगा। पाकिस्तान इसी से घबराया हुआ है और प्रत्यक्ष हमला नहीं कर रहा है, यद्यपि 1942 से अब तक घुसपैठियों व आतंकियों तथा उनके गुर्गों के जरिये जम्मू कश्मीर में अघोषित युद्ध लड़ रहा है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा पूरी तरह सफल और देशहित में सिद्ध हुई।
श्री मोदी की विदेश यात्रा की सफलता जैसी ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर एवं जापान की चार दिवसीय यात्रा बेहद कामयाब रही। दोनों देशों से डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एमओयू (सहमति पत्र) पर हस्ताक्षर हुए। श्री योगी को उत्तर प्रदेश में ढाई लाख करोड़ रुपये पूंजी निवेश के प्रस्ताव यात्रा के दौरान मिले। उत्तर प्रदेश में पूंजी निवेश या नयी, प्रौद्योगिक एवं सेवा इकाइयों से 5 लाख रोजगार सृजित होंगे। विश्व स्तर की दिग्गज कम्पनियों के सहयोग से कृषि मशीनरी, ऑटो आईएम व कंपोनेंट्स, ऑटो अनुसंधान एवं विकास, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर ग्रीन हाईड्रोजन, पॉवर टू गैस, कंप्रेस्ड बायो गैस तथा वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में नई इकाइयां स्थापित होंगी। ये सब उत्तर प्रदेश की चतुर्दिक प्रगति में सहायक होगी।
छोटे पर्दे पर यह देख कर अति प्रसन्नता हुई कि योगी जी ने विदेश में भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाया और प्रचार किया। वसुधैव कुटुंबकम का सन्देश दिया। वह क्षण कितना आह्लादित करने वाला था जब 3 वर्ष के नन्हें जापानी बालक ने योगी जी के स्वागत में संस्कृत का श्लोक सुनाया। जब 500 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने (या कहें उड़ने) वाली बुलेट ट्रेन के डिब्बे में योगी जी को जिज्ञासु की भांति पूछताछ करने का दृश्य टी.वी. पर देखा, तो सुखद संतोषजनक अनुभूति हुई कि एक सन्त के हाथों में उत्तर प्रदेश सुरक्षित भी है, और प्रगति पथ पर अग्रसर भी है।
गोविंद वर्मा (संपादक 'देहात')
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