पंजाब कांग्रेस में घमासान के बीच हाईकमान सख्त, बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ेगी पार्टी
By Hitesh — August 4, 2026

HIGHLIGHTS
- चन्नी गुट और राजा वडिंग के बीच मतभेद से पंजाब कांग्रेस में बढ़ी हलचल।
- हाल के महीनों में कांग्रेस ने कई राज्यों में संगठन से जुड़े बड़े फैसले लिए हैं।
- भूपेश बघेल ने पंजाब चुनाव की रणनीति को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
Author: — Dainik Dehat
नई दिल्ली। राज्यों में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कांग्रेस हाईकमान ने हाल के दिनों में कई अहम संगठनात्मक फैसले लिए हैं। इन निर्णयों के जरिए पार्टी नेतृत्व ने अनुशासन और सख्ती का संदेश देने की कोशिश की है।
हालांकि, चुनावी तैयारी में जुटे पंजाब में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव नहीं किए जाने के फैसले के बाद पार्टी की राज्य इकाई में पिछले कई सप्ताह से राजनीतिक हलचल बनी हुई है।
पंजाब में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी सहित कुछ अन्य नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से इनकार किया है। इसे कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक अहम राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
इसी बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पंजाब विधानसभा चुनाव किसी मुख्यमंत्री चेहरे के बिना और सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। पार्टी का यह फैसला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि हाईकमान किसी दबाव में अपनी रणनीति बदलने के पक्ष में नहीं है।
हाल के महीनों में हाईकमान ने लिए कई बड़े फैसले
पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस नेतृत्व ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और गोवा जैसे राज्यों में संगठन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए कई कड़े फैसले किए। इन निर्णयों में कई वरिष्ठ नेताओं की व्यक्तिगत पसंद और महत्वाकांक्षाओं को भी दरकिनार किया गया।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला इसी क्रम का एक बड़ा निर्णय रहा, जिसे पार्टी नेतृत्व ने लागू किया।
इसी तरह केरल में चुनावी सफलता के बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की जगह लोकप्रिय नेता वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया।
तमिलनाडु और गोवा में भी बदली रणनीति
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने डीएमके से गठबंधन समाप्त कर टीवीके नेता विजय को सरकार गठन के लिए समर्थन देने का फैसला किया। इसके साथ ही मणिक्कम टैगोर को तमिलनाडु कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया। वहीं गोवा में चर्चित चेहरों के बजाय गिरीश चोढ़नकर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन सभी फैसलों में पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय स्तर पर अलग राय होने के बावजूद अपने निर्णय लागू किए।
कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार में नए चेहरों को मौका
सोमवार को कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में भी हाईकमान ने 19 मंत्रियों में कई नए और युवा चेहरों को शामिल करने का फैसला किया, जबकि कई वरिष्ठ नेता बाहर रह गए। इससे नाराज कुछ विधायकों ने इस्तीफे की चेतावनी दी, जिस पर डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि यदि कोई इस्तीफा देता है तो उसे दो मिनट में स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद नाराज नेताओं का रुख नरम पड़ गया।
पंजाब में अब भी जारी है अंदरूनी खींचतान
इसके उलट पंजाब में पार्टी नेतृत्व की सख्ती का असर अभी तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक लगातार राजा वडिंग के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों गुटों के बीच टकराव भी सामने आ रहा है। अब पंजाब मामलों के प्रभारी कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल के खिलाफ भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ने का एलान
चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने विद्रोही नेताओं के दबाव में आने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। मंगलवार को भूपेश बघेल ने घोषणा की कि पंजाब में कांग्रेस बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के सामूहिक नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
चन्नी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
पंजाब कांग्रेस में जारी खींचतान के बीच यह घोषणा चरणजीत सिंह चन्नी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है। चन्नी खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने की मांग कर रहे थे। ऐसे में माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व की सहमति से हुई इस घोषणा के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी कुछ नेताओं के दबाव में अपनी चुनावी रणनीति बदलने वाली नहीं है।
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