असम बना UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य, विधानसभा में विधेयक पास

असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को पारित कर दिया। यह कानून देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि विपक्ष ने मांग की थी कि विधेयक को विस्तृत अध्ययन के लिए चयन समिति को भेजा जाए।
दिनभर चली चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को विधेयक सदन में प्रस्तुत करने की अनुमति दी। इसके बाद विपक्ष की उस मांग को अस्वीकार कर दिया गया, जिसमें विधेयक को और विचार-विमर्श के लिए समिति को भेजने की बात कही गई थी। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य सदन के बीच में आकर नारेबाजी करने लगे और विरोध जताते रहे।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित घोषित कर दिया। इस दौरान सत्तापक्ष के सदस्य “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारे लगाते रहे। अध्यक्ष ने घोषणा की कि विधेयक पारित हो चुका है, जिसके बाद सत्तापक्ष ने इसका समर्थन किया।
विधेयक पारित होने के बाद सदन में तालियों के साथ इसका स्वागत किया गया। यह विधेयक सोमवार को सदन में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य सभी धर्मों के लिए पारिवारिक और व्यक्तिगत मामलों में समान कानून लागू करना है।
कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही उल्लंघन पर सख्त सजा का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें बहुविवाह के मामलों में सात साल तक की जेल और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण न कराने पर तीन महीने तक की सजा शामिल है।
हालांकि, यह कानून असम के अनुसूचित जनजाति समुदायों पर लागू नहीं होगा।
इस विधेयक के पारित होने के साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला तीसरा राज्य बन गया है। वहीं गोवा में पहले से ही एक समान नागरिक संहिता लागू है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पहले कहा था कि यह विधेयक राज्य की सामाजिक संरचना और विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा देना भी है।
इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में भी समान नागरिक संहिता से जुड़े कदम उठाए जा चुके हैं, जहां सरकारों ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया था।
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