मई में भारत-पाक तनाव में चीन ने निभाई अहम भूमिका, ट्रंप के बाद अब वांग यी का दावा

नई दिल्ली। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव में चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने बीजिंग में आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल स्थानीय युद्ध और सीमा पार झड़पें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे तीव्र रही हैं और स्थायी शांति बनाए रखने के लिए चीन ने निष्पक्ष रुख अपनाया।
हालांकि, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि 7 से 10 मई 2025 के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुई झड़प का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के सीधे संवाद के जरिए ही हुआ था। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई को फोन पर हुई बातचीत में तय की थी, जो शाम 3:35 बजे शुरू हुई थी। भारत की स्थिति यह है कि भारत-पाक सीमा मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता या जगह नहीं है।
वांग यी ने संगोष्ठी में कहा कि चीन ने अन्य अंतरराष्ट्रीय विवादों में भी मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जिनमें उत्तर म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दा, फलस्तीन और इस्राइल का विवाद, और हाल ही में कंबोडिया और थाईलैंड के संघर्ष शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने समाधान के लिए निष्पक्ष और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकवादी हमले और इसके बाद भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किए गए हमलों के दौरान बढ़ा। यह ऑपरेशन 7 से 10 मई तक चला। इस दौरान चीन की भूमिका विवादास्पद रही, खासकर पाकिस्तान को सैन्य मदद देने को लेकर।
चीन ने 7 मई को दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया और भारत की कार्रवाई पर खेद व्यक्त किया। चीन के विदेश मंत्रालय ने उस समय कहा था कि भारत की सुबह की सैन्य कार्रवाई खेदजनक है और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सक्रिय मदद प्रदान की, जिससे बीजिंग और नई दिल्ली के संबंधों पर चीन-पाकिस्तान संबंधों के नकारात्मक असर उजागर हुए।
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