दिल्ली की यूनिवर्सिटीज बनें रिसर्च हब: उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू

नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी की यूनिवर्सिटीज को केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थानों की बजाय अनुसंधान और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को अब दिल्ली की वास्तविक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कुलपतियों के साथ हुई अहम बैठक
उपराज्यपाल ने बुधवार को दिल्ली सरकार के अधीन आने वाली विभिन्न यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों और निदेशकों के साथ बैठक की। इस दौरान शिक्षा, अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से राजधानी के विकास को गति देने पर विस्तार से चर्चा हुई।
एलजी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन के अनुरूप विश्वविद्यालयों को नवाचार, शोध और सामाजिक बदलाव का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने संस्थानों से अपील की कि वे केवल डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि रिसर्च के जरिए व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजें।
प्रदूषण और शहरी समस्याओं पर फोकस
संधू ने विशेष रूप से वायु प्रदूषण, ट्रैफिक, शहरी परिवहन, मानसिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं जैसी चुनौतियों पर शोध आधारित समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में मौजूद ज्ञान और शोध क्षमता का लाभ सीधे शहर और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
छात्रों की भागीदारी पर जोर
बैठक में छात्रों की सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने एनएसएस, एनसीसी और गांव गोद लेने जैसी योजनाओं के माध्यम से छात्रों को समाज से जोड़ने की बात कही, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ नवाचार और रोजगार सृजन में भी योगदान दे सकें।
तकनीक और एआई को बताया भविष्य की जरूरत
एलजी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से तकनीक-आधारित शिक्षा और शोध प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया, ताकि संस्थान भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।
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