'राज्य दर्जा और छठी अनुसूची की मांग जायज, बातचीत में पीछे नहीं हटेंगे': वांगचुक

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे केंद्र सरकार के साथ वार्ता में हिस्सा लेने से पीछे नहीं हटेंगे। वांगचुक को 14 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत करीब छह महीने की हिरासत में रहने के बाद रिहा किया गया था।
वांगचुक ने इस आंदोलन के लिए खुले मन और ईमानदारी से समाधान खोजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा संविधान के लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत पूरी तरह न्यायसंगत मांगें हैं। पिछले पांच-छह वर्षों से इन मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन कड़ा रुख अपनाने के कारण अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला। उन्होंने कहा कि बातचीत में कोई पक्ष यह न सोचे कि केवल वही जीतेगा; जरूरत है मध्य मार्ग और संतुलित समाधान की।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए तैयार हैं, लेकिन यह एकतरफा नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की आवाज़ अब देश के निष्पक्ष लोगों तक पहुंच चुकी है। वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर आगामी वार्ता में उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो सवाल उठेगा कि लद्दाख के नेताओं के संतुलित रुख को क्यों नहीं माना जा रहा।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लगाए गए आरोपों पर वांगचुक ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आरोप उन पर लगाए जा सकते हैं जिन्होंने हमेशा शिक्षा और पर्यावरण के लिए काम किया है, तो अन्य लोगों के लिए क्या कहा जा सकता है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और संबंधित वीडियो पर भी आपत्ति जताई।
वांगचुक ने लद्दाख, विशेषकर कारगिल, को देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में स्थानीय लोगों के बलिदान का स्मरण कराया और कहा कि ऐसे आरोप लोगों के बीच दूरी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र द्वारा उनके खिलाफ आरोप हटाना भरोसा बनाने और सार्थक संवाद के लिए एक सकारात्मक कदम है।
अगली रणनीति पर विचार करते हुए वांगचुक ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे गृह मंत्रालय के साथ वार्ता में हिस्सा लेने से पीछे नहीं हटेंगे और आंदोलन का उद्देश्य हमेशा संतुलित समाधान और लद्दाख के हित में रहेगा।
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