वेस्ट एशिया संकट पर सरकार अलर्ट, PM मोदी ने CCS बैठक में ऊर्जा और भारतीयों की सुरक्षा की समीक्षा की

HIGHLIGHTS
- पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी ने सीसीएस की विशेष बैठक में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा की।
- खाड़ी देशों में रह रहे एक करोड़ से अधिक भारतीयों और नाविकों की सुरक्षा पर विशेष चर्चा हुई।
- सरकार ने उर्वरकों और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक होने का भरोसा जताया।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की विशेष बैठक बुलाई। इस मुद्दे पर यह चौथी विशेष सीसीएस बैठक थी।
बैठक में मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा की गई। साथ ही भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और उनसे निपटने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में संघर्ष बढ़ने की स्थिति में उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका, ऊर्जा सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में खाड़ी क्षेत्र में रह रहे एक करोड़ से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर हुई समीक्षा
सरकार की ओर से बताया गया कि कैबिनेट सचिव ने समिति को मौजूदा हालात की जानकारी दी। उन्होंने एलएनजी, एलपीजी समेत पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया।
बैठक में बताया गया कि एलपीजी के आयात स्रोतों में पहले ही विविधता लाई जा चुकी है और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार तथा आपूर्ति की स्थिति पर्याप्त है।
पर्याप्त कच्चे तेल की उपलब्धता के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर संचालित हो रही हैं। इसके अलावा पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन बढ़ाने और राष्ट्रीय गैस ग्रिड के विस्तार जैसे कदम भी जारी हैं।
सरकार ने बताया कि मार्च 2026 से ही इन तैयारियों पर काम शुरू कर दिया गया था, जब ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण देश में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई थी।
रबी सीजन की तैयारियों पर भी चर्चा
बैठक में रबी सीजन के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन किया गया और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए कि उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में घरेलू और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
सरकार के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में यूरिया की वार्षिक खपत करीब चार करोड़ टन है, जबकि सभी प्रमुख उर्वरकों की कुल खपत 6 से 7 करोड़ टन के बीच रहती है।
जुलाई 2026 तक पश्चिम एशिया संकट के बावजूद सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। खरीफ 2026 के लिए यूरिया की आवश्यकता लगभग 109-110 लाख टन आंकी गई थी, जबकि उपलब्धता 163 लाख टन है। डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकार ने अतिरिक्त आयात और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर बफर स्टॉक तैयार किया है। फिलहाल किसी कमी की आशंका नहीं है, हालांकि वैश्विक कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि भारतीय नाविकों और उनके परिवारों को समय पर जानकारी, आपातकालीन सहायता और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। साथ ही ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सौर ऊर्जा समेत नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।
प्रधानमंत्री ने सभी घटनाक्रमों की नियमित निगरानी के लिए एक समन्वित और एकीकृत तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई की जा सके।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। जून में हुए समझौते के बावजूद जुलाई में हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बनी हुई है। क्षेत्र में लगातार हमलों की खबरें आ रही हैं और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मौजूदा हालात को गंभीर मान रहे हैं।
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