कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे पर बोले डीके शिवकुमार- 'एक मिनट में मंजूर कर लूंगा'

HIGHLIGHTS
- यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल और बेलूर गोपालकृष्ण ने कैबिनेट में जगह नहीं मिलने के बाद इस्तीफा दिया।
- डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी के साथ बने रहना राजनीतिक भविष्य के लिए जरूरी है।
- मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को सूखे से राहत कार्यों की समीक्षा के लिए जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए।
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई है। दोनों विधायकों ने राज्य कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं मिलने से नाराज होकर विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। शिवकुमार ने कहा कि यह सब राजनीति का हिस्सा है और अगर कोई इस्तीफा देता है तो उसे स्वीकार करने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगेगा।
डीके शिवकुमार ने कहा, "वो सभी राजनीति कर रहे हैं और इस्तीफा स्वीकार करने में एक मिनट भी नहीं लगाऊंगा।" उन्होंने कहा कि इस्तीफा देना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जो लोग इस्तीफा देना चाहते हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर कोई इस्तीफा देता है तो मैं उसे कुछ ही मिनटों में मंजूर कर लूंगा। अगर वे पार्टी और अपना राजनीतिक भविष्य चाहते हैं तो उन्हें बने रहना चाहिए।"
'पार्टी मजबूत हो तो बाकी चीजें अपने आप होती हैं'
अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्हें भी पहले मंत्री पद नहीं मिला था, लेकिन उन्होंने पार्टी के साथ बने रहने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा, "अगर पार्टी है तो बाकी सब चीजें अपने आप हो जाती हैं। जब धर्म सिंह और सिद्दरमैया के कार्यकाल में मुझे मंत्री पद नहीं मिला था तो मैं भी इस्तीफा दे सकता था। क्या जी. परमेश्वर और मैंने सब्र नहीं रखा था?"
मंत्रियों को जिलों का दौरा करने के निर्देश
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे सूखे से राहत की स्थिति का जायजा लेने के लिए तुरंत अपने-अपने जिलों का दौरा करें।
उनका यह बयान कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल (इंडी) और बेलूर गोपालकृष्ण (सागर) के विधानसभा से इस्तीफा देने के एक दिन बाद आया है। दोनों विधायक कैबिनेट विस्तार में शामिल नहीं किए जाने से नाराज थे।
यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने विधान सौधा में डिप्टी स्पीकर रुद्रप्पा लमानी को अपना इस्तीफा सौंपा था। इसके बाद बेंगलुरु में उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके साथ अन्याय किया है।
वहीं, बेलूर गोपालकृष्ण ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया।
पत्रकारों से बातचीत में पाटिल ने दावा किया कि अंतिम समय तक मंत्रियों की सूची में उनका नाम था, लेकिन अंतिम घोषणा के दौरान उसे हटा दिया गया।
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