बेटी के नाम PPF की रकम से गुजारा-भत्ता नहीं दे सकता पिता, दिल्ली HC का बड़ा फैसला

HIGHLIGHTS
- वर्ष 2016 में खाते से 8 लाख रुपये से अधिक की रकम निकाली गई थी।
- बेटी को 2017 में रकम निकाले जाने की जानकारी मिली थी।
- पिता ने रकम को पत्नी के भरण-पोषण में खर्च करने की दलील दी।
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पिता अपनी बेटी के नाम जमा पीपीएफ की रकम का इस्तेमाल पत्नी या बेटी को गुजारा-भत्ता देने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि बच्चे के नाम किया गया निवेश उसके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से होता है। इसे माता-पिता के आपसी विवाद या भरण-पोषण की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
यह फैसला सुधीर कवात्रा बनाम शामली कवात्रा मामले में सुनाया गया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पिता को बेटी के पीपीएफ खाते की पूरी रकम 8 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया गया था।
1999 में बेटी के नाम खोला था PPF खाता
मामले के अनुसार, सुधीर कवात्रा ने वर्ष 1999 में अपनी बेटी शामली कवात्रा के नाम पर पीपीएफ खाता खुलवाया था। इसमें बेटी की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए रकम जमा की गई थी।
शामली के मुताबिक, वर्ष 2017 में पीपीएफ की अवधि पूरी होने के बाद जब वह बैंक पहुंचीं, तब उन्हें जानकारी मिली कि उनके पिता ने वर्ष 2016 में ही खाते से 8 लाख रुपये से अधिक की पूरी रकम निकालकर खाता बंद कर दिया था।
बेटी का आरोप था कि यह रकम उसकी शिक्षा और भविष्य के लिए जमा की गई थी, लेकिन इसका इस्तेमाल उसकी पढ़ाई पर नहीं किया गया। इसके बाद रकम वापस पाने के लिए उसने अदालत का रुख किया।
पिता ने गुजारा-भत्ते के लिए रकम खर्च करने की दी दलील
पिता की ओर से अदालत में कहा गया कि माता-पिता के बीच विवाद के कारण वे अलग रह रहे थे और फैमिली कोर्ट के आदेश के तहत पत्नी के भरण-पोषण के लिए यह रकम खर्च की गई थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वह पत्नी को अतिरिक्त गुजारा-भत्ता दे रहे थे और इसका लाभ बेटी को भी मिल रहा था। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि पत्नी के गुजारा-भत्ते और बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी अलग-अलग कानूनी जिम्मेदारियां हैं। पिता इन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए बेटी के नाम पर जमा रकम का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
बेटी के नाम निवेश पर उसी का अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि पीपीएफ खाता पिता ने भले ही खुलवाया था, लेकिन यह बेटी के लाभ और उसके भविष्य के लिए था। पिता इस खाते का संचालन केवल अभिभावक के तौर पर कर रहे थे। बेटी के बालिग होने के बाद वह इस रकम की हकदार थी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की परवरिश और उनकी जरूरतों का खर्च उठाना माता-पिता की अलग कानूनी जिम्मेदारी है। इसे बच्चे के नाम पर जमा निवेश की रकम से पूरा नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पिता को बेटी की पूरी पीपीएफ रकम 8 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया।
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