ईंधन महंगा होने पर खरगे का केंद्र पर हमला, बोले- जनता पर 'किस्तों में बोझ' डाल रही सरकार

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आठ दिनों के भीतर तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता की कमाई पर “किस्तों में बोझ” डाल रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि देश में नेतृत्व का संकट दिखाई दे रहा है और जब वैश्विक स्तर पर कई देश अपने नागरिकों को राहत दे रहे हैं, तब भारत में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ाई जा रही हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पेट्रोल कई स्थानों पर 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है और सरकार टैक्स के जरिए जनता पर भारी बोझ डाल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ईंधन पर रोजाना भारी मात्रा में टैक्स वसूल रही है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा आम लोगों को नहीं मिला।
खरगे ने आगे कहा कि संकट की परिस्थितियों में अन्य देश अपने नागरिकों को राहत देने के लिए ईंधन पर टैक्स घटा रहे हैं, जबकि भारत में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि इटली, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन और आयरलैंड ने अपने नागरिकों को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती और सहायता पैकेज लागू किए हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि “इस किस्तों वाली लूट” से किसे फायदा हो रहा है और जनता कब तक इसका बोझ उठाती रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अब देश की जनता स्थिति को समझ चुकी है और सवाल उठा रही है।
इधर, शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों में कुल मिलाकर ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है।
इससे पहले 15 मई को 3 रुपये प्रति लीटर और 19 मई को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लगातार हो रही इन बढ़ोतरी के चलते आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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