Deepfake और AI कंटेंट पर सरकार सख्त, 3 घंटे में हटाना होगा गैरकानूनी कंटेंट; जानें नए IT नियम

HIGHLIGHTS
- AI से तैयार कंटेंट की पहचान के लिए लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य किया गया।
- सरकार और अदालत के आदेश पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा घटाई गई।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को डीपफेक और भ्रामक कंटेंट पर तेज कार्रवाई करनी होगी।
भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार डीपफेक और फर्जी डिजिटल सामग्री पर रोक लगाने के लिए आईटी नियमों को और मजबूत कर दिया है। नए संशोधनों के अनुसार अब एआई से बनाई गई किसी भी सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना जरूरी होगा, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से समझ सकें कि कंटेंट वास्तविक है या एआई के माध्यम से तैयार किया गया है। इसके अलावा सरकार या अदालत के आदेश पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा को 36 घंटे से घटाकर अब केवल 3 घंटे कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार बनाना है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार डीपफेक से जुड़े बढ़ते जोखिमों को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने बताया कि डीपफेक में सिर्फ नकली वीडियो ही नहीं, बल्कि एआई से तैयार ऑडियो, फोटो और टेक्स्ट सामग्री भी शामिल है। ऐसे कंटेंट पर नियंत्रण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कानूनी और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
नए आईटी नियमों में हुए प्रमुख बदलाव
एआई सामग्री पर लेबल जरूरी:
एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट पहचान और मेटाडेटा देना अनिवार्य होगा।
यूजर्स को जानकारी देना जरूरी:
डिजिटल प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग आसानी से पहचान सकें कि कोई सामग्री एआई से बनाई गई है।
तकनीकी निगरानी होगी मजबूत:
गैरकानूनी एआई सामग्री के निर्माण, प्रसार और प्रकाशन को रोकने के लिए तकनीकी उपाय लागू करने होंगे।
डीपफेक पर तत्काल कार्रवाई:
प्रतिरूपण और भ्रामक एआई सामग्री के खिलाफ तुरंत कदम उठाने होंगे।
बाल यौन शोषण सामग्री पर रोक:
एआई से तैयार ऐसी सामग्री की पहचान कर उसे तत्काल हटाना जरूरी होगा।
बिना सहमति की अंतरंग सामग्री पर कार्रवाई:
बिना अनुमति साझा की गई निजी तस्वीरों और वीडियो पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ी:
कंपनियों को कानून के अनुसार उचित सावधानी बरतनी होगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
स्वचालित निगरानी व्यवस्था:
बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हानिकारक एआई सामग्री की पहचान के लिए तकनीकी सिस्टम लागू करने होंगे।
सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ी जिम्मेदारी
नए आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने यूजर्स को स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि फर्जी पहचान, गलत जानकारी, हिंसक सामग्री, अश्लील कंटेंट, बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली पोस्ट और एआई के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कानून का उल्लंघन है।
50 लाख या उससे ज्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना, नियमित अनुपालन रिपोर्ट जारी करना, भारत में स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग बनाए रखना होगा। गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों को जरूरी तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करानी होगी।
नियमों में हुए बदलाव
| प्रावधान | नई व्यवस्था |
|---|---|
| एआई कंटेंट | स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य |
| गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा | 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे |
| संवेदनशील शिकायतों का निपटारा | 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे |
| अत्यंत संवेदनशील मामलों में कार्रवाई | 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे |
| बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म | शिकायत अधिकारी, अनुपालन रिपोर्ट और स्थानीय अधिकारी अनिवार्य |
| शिकायत दर्ज करने का माध्यम | नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 |
कार्रवाई की समयसीमा और दंड में बदलाव
सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अब सरकार या अदालत का आदेश मिलने के बाद ऐसी सामग्री को अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। वहीं कुछ संवेदनशील मामलों में शिकायत निपटारे की समयसीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे और बेहद संवेदनशील मामलों में 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे कर दी गई है।
यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है और उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
डीपफेक रोकने के लिए सरकार के कदम
सरकार ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), शिकायत अपीलीय समिति (GAC), सहयोग पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से डीपफेक और साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत किया गया है।
नागरिक cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। भारत एआई मिशन के तहत आईआईटी जोधपुर, आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर सहित कई संस्थानों में डीपफेक पहचान तकनीक विकसित की जा रही है।
सरकार का कहना है कि कानून, तकनीक और जागरूकता के माध्यम से एआई के गलत इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।
डीपफेक पर कार्रवाई के लिए कौन से कानून लागू होंगे?
सरकार के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता का उल्लंघन, अश्लील सामग्री फैलाने और गैरकानूनी डिजिटल गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करना, गलत सूचना फैलाना और संगठित साइबर अपराध जैसे मामलों में भी कार्रवाई का प्रावधान है।
जागरूकता और निगरानी बढ़ाने की योजना
सरकार ने बताया कि साइबर सुरक्षा जागरूकता माह, सुरक्षित इंटरनेट दिवस, स्वच्छता पखवाड़ा और साइबर जागरूकता दिवस जैसे अभियानों के जरिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) समय-समय पर डीपफेक और एआई आधारित साइबर खतरों से बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी करती है। इसके अलावा सोशल मीडिया कंपनियों को धार्मिक मामलों, भ्रामक एआई सामग्री और बिना सहमति साझा की गई निजी तस्वीरों से जुड़े मामलों पर भी अलग-अलग सलाह जारी की गई है।
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