मणिपुर में CRPF जवान की संदिग्ध मौत, लखनऊ में शव रखकर 5 घंटे प्रदर्शन; पत्नी ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

HIGHLIGHTS
- विनीत सिंह मणिपुर में सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तैनात थे।
- पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद लखनऊ में परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया।
- पत्नी ने अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।
मणिपुर में तैनात सीआरपीएफ जवान विनीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद लखनऊ के बुद्धेश्वर स्थित आदर्श विहार कॉलोनी में परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा देखने को मिला। बृहस्पतिवार देर रात जवान का पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर दुबग्गा से अवध चौराहे जाने वाले मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
करीब पांच घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने दोबारा पोस्टमार्टम, मामले की निष्पक्ष जांच, शहीद का दर्जा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की मांग की। प्रदर्शन के कारण दुबग्गा से कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाने वाला यातायात भी प्रभावित रहा।
विनीत सिंह (37) मणिपुर में सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तैनात थे। देर रात उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजन भावुक हो गए। उन्होंने जवान की मौत को संदिग्ध बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पत्नी ने अधिकारियों पर लगाए प्रताड़ना के आरोप
विनीत सिंह की पत्नी नेहा सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पति को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था, जिसके कारण उन्होंने गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
उन्होंने कहा कि विनीत सिंह के माथे पर गोली लगी थी, लेकिन मणिपुर में कराए गए पोस्टमार्टम से परिवार संतुष्ट नहीं है। उन्होंने लखनऊ में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की, ताकि मौत की सही वजह सामने आ सके।
पुलिस अधिकारियों ने समझाया, पांच घंटे बाद खत्म हुआ जाम
प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद एडीसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा, एसीपी काकोरी शकील अहमद, आईपीएस अमित कुमावत समेत कई थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची।
अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। करीब पांच घंटे बाद अधिकारियों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने और परिजनों का ज्ञापन जिलाधिकारी तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इसके बाद पत्नी नेहा सिंह ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन एडीसीपी पश्चिमी को सौंपा। ज्ञापन में दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और शहीद का दर्जा देने की मांग की गई।
आश्वासन मिलने के बाद परिजन शव लेकर हरदोई के लिए रवाना हो गए। शुक्रवार को पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि परिजनों की मांगों से शासन को अवगत करा दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मौत से 11 मिनट पहले हुई थी आखिरी बातचीत
नेहा सिंह के अनुसार, विनीत सिंह का 23 जून को मणिपुर स्थित सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तबादला हुआ था। 5 अगस्त की शाम 7:36 बजे उनकी अपने पति से आखिरी बार बातचीत हुई थी।
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान विनीत सिंह ने बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों से परेशान होने की बात कही थी। साथ ही कैंप में हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना के बाद तनाव में होने की बात भी बताई थी। पत्नी के मुताबिक, उन्होंने छुट्टी मांगी थी, लेकिन उन्हें अवकाश नहीं मिला।
नेहा सिंह का दावा है कि बातचीत के करीब 11 मिनट बाद शाम 7:47 बजे सीआरपीएफ अधिकारियों की व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें बताया गया कि विनीत सिंह कैंप परिसर में बैरक के पीछे गंभीर रूप से घायल मिले हैं। इसके बाद उनकी मौत की जानकारी दी गई।
पत्नी ने कमांडेंट समेत अन्य अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
2009 में CRPF में हुए थे भर्ती
विनीत सिंह वर्ष 2009 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनकी पहली तैनाती प्रशिक्षण के लिए केरल में हुई थी।
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