मेरठ में फर्जी पुलिस चौकी का भंडाफोड़, नकली एसएचओ और दरोगा गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- मेरठ के मोहकमपुर में फर्जी पुलिस चौकी चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़।
- नकली एसएचओ और दरोगा बनकर लोगों से रंगदारी वसूलते थे आरोपी।
- इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर हनी ट्रैप के जरिए शिकार को फंसाया जाता था।
- पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- कार्यालय से वॉकी-टॉकी, नेम प्लेट और पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई।
मेरठ। ब्रह्मपुरी पुलिस ने टीपीनगर थाना क्षेत्र के मोहकमपुर में एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो कार्यालय की आड़ में अवैध पुलिस चौकी संचालित कर रहा था। गिरोह के सदस्य खुद को सीओ, एसएचओ और दरोगा बताकर लोगों को हनी ट्रैप में फंसाते और उनसे अवैध वसूली करते थे। कार्यालय को पुलिस चौकी जैसा दिखाने के लिए वहां वॉकी-टॉकी, नेम प्लेट और पुलिस की वर्दी भी रखी गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फर्जी एसएचओ और फर्जी दरोगा को गिरफ्तार कर लिया है।
यह कार्रवाई एक डेयरी संचालक की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत के अनुसार, गिरोह से जुड़े शशांक शर्मा ने इंस्टाग्राम के माध्यम से उससे दोस्ती की और उसे अपने जाल में फंसा लिया। शशांक के बुलावे पर जब डेयरी संचालक मिलने पहुंचा तो वहां मौजूद गिरोह के अन्य सदस्यों ने खुद को क्षेत्राधिकारी, थानेदार और दरोगा बताते हुए उसे बंधक बना लिया। आरोपियों ने जेल भेजने और एनकाउंटर की धमकी देकर उससे दो लाख रुपये की मांग की तथा 10 हजार रुपये वसूल लिए।
पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह इंस्टाग्राम पर शशांक शर्मा नाम के युवक के संपर्क में था। शशांक ने 30 जुलाई की शाम करीब सात बजे दिल्ली रोड स्थित शॉप्रिक्स मॉल के सामने एक सुनसान स्थान पर मिलने के लिए बुलाया। वहां पहुंचते ही पहले से मौजूद चार-पांच लोगों ने उस पर हमला कर दिया।
आरोपियों ने उसे जबरन एक सफेद अल्टो कार में बैठा लिया। कार के भीतर उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई और हाथों में हथकड़ी लगा दी गई। उसे सीट के नीचे दबाकर रखा गया और रास्ते भर मारपीट की गई। राहुल पाल नाम के आरोपी ने उस पर पिस्टल तानते हुए पैर में गोली मारकर एनकाउंटर करने की धमकी भी दी।
खुद को सीओ और एसओ बताकर बनाई धाक
पीड़ित के अनुसार, अपहर्ता खुद को सिविल लाइन थाने का पुलिसकर्मी बताते रहे। उन्होंने कहा कि शशांक ने उसके खिलाफ इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर शोषण करने की शिकायत दी है और उसके पास इसके सबूत भी हैं। इसके बाद आरोपी उसे एक कार्यालय में ले गए। अंदर ले जाकर दोबारा मारपीट की गई, उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया और गूगल पे का पासवर्ड पूछा गया। उसका नाम और पता एक रजिस्टर में दर्ज किया गया तथा वीडियो भी बनाया गया।
एनकाउंटर की धमकी देकर मांगे दो लाख रुपये
आरोपियों ने पीड़ित के पैर में तौलिया बांधकर पिस्टल दिखाते हुए एनकाउंटर की धमकी दी और दो लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने एक लाख रुपये देने की बात कही। आरोपियों ने उसे ऑनलाइन पैसे मंगाने के लिए कहा। इस पर उसने अपने पड़ोसी से 10 हजार रुपये ऑनलाइन मंगवाए, जिन्हें राहुल पाल ने अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। बाकी 90 हजार रुपये अगले दिन सुबह 11 बजे तक देने की बात तय हुई।
पूरी रात बनाया बंधक
पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने उसे पूरी रात बंधक बनाए रखा। उसने कई लोगों से फोन पर मदद मांगी, लेकिन किसी ने पैसे नहीं भेजे। इसके बाद उसने कहा कि वह अपनी छह भैंसों में से दो बेचकर रकम का इंतजाम कर देगा। आरोपी फिर भी नहीं माने और लगातार एनकाउंटर की धमकी देते रहे।
बाद में पीड़ित ने इस्लामुद्दीन नाम के व्यक्ति को कॉल करने की बात कही। खुद को थानाध्यक्ष बताने वाला राहुल और दरोगा बताने वाला आकाश उसे अल्टो कार से उसके घर की ओर ले जाने लगे ताकि भैंसें बेची जा सकें। रास्ते में आकाश उसे बाइक पर बैठाकर मनीष सिंह के गैस गोदाम पहुंचा। वहां मनीष सिंह को आकाश के दरोगा होने पर संदेह हुआ। पूछताछ और जांच शुरू होते ही आरोपी मौके से फरार हो गए।
कार्यालय से आती थीं मारपीट की आवाजें
जांच के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि आरोपी खुद को मीडियाकर्मी बताते थे। उनके कार्यालय पर अक्सर वर्दीधारी पुलिसकर्मी बाइक से आते-जाते दिखाई देते थे। राहुल पाल की पुलिसकर्मियों के साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हैं।
शनिवार को शॉप्रिक्स मॉल के सामने स्थित सड़क से करीब एक किलोमीटर अंदर पहुंचने पर आरोपियों का कार्यालय मिला। यह एक मकान के भीतर संचालित किया जा रहा था। मौके पर घर और कार्यालय दोनों पर ताला लगा हुआ था। आसपास के लोगों ने पहले जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन बाद में दो स्थानीय निवासियों ने बताया कि राहुल पाल ने करीब एक वर्ष पहले यह प्लॉट खरीदा था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी वर्ष दिन-रात काम कराकर यहां मकान और कार्यालय तैयार किया गया था। लगभग तीन महीने पहले कार्यालय शुरू हुआ और इसके बाद राहुल ने एक अल्टो कार खरीदी। वह खुद को मीडियाकर्मी बताता था। कई बार कार्यालय के अंदर से किसी की पिटाई की आवाजें भी सुनाई देती थीं, लेकिन उसके प्रभाव के चलते किसी ने विरोध या पूछताछ नहीं की।
सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के साथ साझा करता था तस्वीरें
आरोपी सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के साथ तस्वीरें साझा कर अपनी पहचान और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता था। पुलिस अधिकारियों के साथ उसकी कई तस्वीरें वायरल हैं। पुलिस अब उन पुलिसकर्मियों की भी जानकारी जुटा रही है, जिनके साथ आरोपी की तस्वीरें सामने आई हैं।
इंस्टाग्राम के जरिए लोगों को बनाते थे शिकार
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह इंस्टाग्राम पर नए लोगों से दोस्ती करता था। इसके बाद उनके मोबाइल नंबर लेकर कॉल की जाती थी। आरोपी उन लोगों को भी निशाना बनाते थे जो लड़कियों से बातचीत करना पसंद करते हैं और उन लोगों को भी जो लड़कों से बात करना पसंद करते हैं। लड़कियों से बातचीत पसंद करने वाले लोगों से आरोपी लड़की की आवाज में बात करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि एक आरोपी के खाते में एक महीने के भीतर करीब तीन लाख रुपये के ट्रांजेक्शन हुए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य लोग भी इस गिरोह का शिकार बने होंगे। पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है।
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