US का नया Visa Rule लागू, 50 देशों के नागरिकों पर बॉन्ड की शर्त; भारत को राहत

HIGHLIGHTS
- नया नियम 3 अगस्त से प्रभावी होगा और वीजा अधिकारी जरूरत के अनुसार बॉन्ड मांग सकेंगे।
- भारत समेत कुछ देशों के नागरिकों को इस व्यवस्था से फिलहाल बाहर रखा गया है।
- 2025 में शुरू हुई पायलट योजना के बाद अमेरिकी सरकार ने इसे स्थायी करने का फैसला लिया।
अमेरिका ने वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को अब स्थायी रूप दे दिया है। नए नियमों के तहत कुछ देशों के नागरिकों को बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) वीजा जारी होने से पहले 20,000 डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) तक की सिक्योरिटी मनी जमा करनी पड़ सकती है। यह नया नियम 3 अगस्त से लागू होगा।
अमेरिकी सरकार ने फेडरल रजिस्टर में जारी अधिसूचना के जरिए इस फैसले की जानकारी दी है। इसके अनुसार, वीजा अधिकारी आवश्यकता पड़ने पर किसी भी पात्र आवेदक से वीजा जारी करने से पहले बॉन्ड जमा करने की मांग कर सकते हैं।
फिलहाल यह नियम 50 देशों के नागरिकों पर लागू किया जाएगा। इनमें ज्यादातर देश अफ्रीका के हैं। भारत के नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि भारत इस सूची में शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि भारतीयों को B-1 (बिजनेस) और B-2 (टूरिस्ट) वीजा के लिए आवेदन करते समय बॉन्ड जमा नहीं करना होगा।
हालांकि, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया जा सकता है। वर्तमान सूची में बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देश शामिल हैं।
2025 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी योजना
अमेरिका ने इस वीजा बॉन्ड योजना की शुरुआत वर्ष 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की थी। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि क्या बॉन्ड व्यवस्था के जरिए लोग वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका में रुकने यानी वीजा ओवरस्टे की स्थिति से बचेंगे।
अमेरिकी सरकार के अनुसार, पायलट योजना के परिणाम सकारात्मक रहे, जिसके बाद इसे स्थायी करने का फैसला लिया गया। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों का हिस्सा माना जा रहा है।
पहले इस योजना के तहत 5,000, 10,000 और 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड लिया जाता था। नए नियम में 5,000 डॉलर वाले विकल्प को हटा दिया गया है और अधिकतम बॉन्ड राशि बढ़ाकर 20,000 डॉलर कर दी गई है।
नियम लागू करने का उद्देश्य क्या है?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस नियम से वीजा धारक शर्तों का पालन करेंगे और तय अवधि के बाद अवैध रूप से अमेरिका में रहने की संभावना कम होगी।
वहीं, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से कारोबार या पर्यटन के लिए अमेरिका जाने वाले कई वास्तविक यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन पहले ही कई वीजा श्रेणियों की फीस में बढ़ोतरी कर चुका है और वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट की जांच प्रक्रिया को भी पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.