तमिलनाडु में सियासी घमासान: DMK, VCK और TVK के बीच तीखी बयानबाजी

HIGHLIGHTS
- तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को सियासी माहौल अचानक गरमा गया, जब DMK, उसकी पूर्व सहयोगी VCK और अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी TVK के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।
- सत्ता साझेदारी और गठबंधन की नई राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर तीनों दलों के बीच काव्यात्मक तंज और राजनीतिक कटाक्ष देखने को मिले।
- DMK सांसद ए.
- राजा की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद इस पूरे विवाद की शुरुआत DMK सांसद ए.
- राजा के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई।
- उन्होंने शास्त्रीय तमिल साहित्य के एक प्रतीक ‘टेढ़े नारियल के पेड़’ का जि…
तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को सियासी माहौल अचानक गरमा गया, जब DMK, उसकी पूर्व सहयोगी VCK और अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी TVK के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। सत्ता साझेदारी और गठबंधन की नई राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर तीनों दलों के बीच काव्यात्मक तंज और राजनीतिक कटाक्ष देखने को मिले।
DMK सांसद ए. राजा की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत DMK सांसद ए. राजा के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने शास्त्रीय तमिल साहित्य के एक प्रतीक ‘टेढ़े नारियल के पेड़’ का जिक्र करते हुए परोक्ष रूप से राजनीतिक सहयोगियों पर तंज कसा।
तमिल साहित्य में यह प्रतीक ऐसे व्यक्ति या स्थिति के लिए इस्तेमाल होता है, जहां कोई वस्तु अपनी जगह पर रहते हुए भी अपने प्रभाव से पड़ोसी को लाभ पहुंचा दे। इसी संदर्भ में राजा के पोस्ट को VCK पर कटाक्ष के रूप में देखा गया।
राजा ने अपने पोस्ट में लिखा कि यदि कोई नारियल का पेड़ अपने बगीचे से झुककर सामने वाले घर में फल दे, तो उसे साहित्य में विशेष नाम दिया जाता है, लेकिन राजनीति में इसे क्या कहा जाए।
VCK का पलटवार
DMK के इस तंज के जवाब में VCK नेता एस.एस. बालाजी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सामाजिक रूप से वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के सत्ता में आने से DMK को आपत्ति क्यों है।
बालाजी ने तमिल कविता शैली में जवाब देते हुए कहा कि जब वंचित वर्ग को सत्ता में भागीदारी मिलती है, तो कुछ लोगों को असहजता महसूस होती है, लेकिन इससे बदलाव की प्रक्रिया नहीं रुकती।
TVK ने किया सहयोगी का बचाव
VCK के समर्थन में TVK भी खुलकर सामने आ गई। पार्टी ने DMK की टिप्पणियों को सत्ता-साझेदारी की राजनीति पर हमला बताया और कहा कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
TVK ने आरोप लगाया कि DMK, वैकल्पिक राजनीतिक सोच और नए गठबंधनों को स्वीकार नहीं कर पा रही है और इसी वजह से तीखी भाषा का इस्तेमाल कर रही है।
पार्टी ने यह भी कहा कि TVK की बढ़ती राजनीतिक ताकत से स्थापित दलों में असहजता बढ़ रही है, जिससे इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की पृष्ठभूमि
हाल के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 234 सीटों में से TVK ने 108 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया, हालांकि वह बहुमत से कुछ दूरी पर रह गई।
चुनाव के बाद गठबंधन और सत्ता-साझेदारी को लेकर कई दिनों तक अनिश्चितता बनी रही, जिसके बाद VCK और अन्य सहयोगी दलों के सरकार में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गईं।
इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य को इस मौजूदा विवाद की मुख्य वजह माना जा रहा है, जहां पुराने सहयोगी अब एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं।
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