पटना में मतदाता सूची विवाद पर प्रदर्शन, पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला पहुंचे प्रदर्शनकारी

HIGHLIGHTS
- पटना में मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन।
- प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ी।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग।
पटना। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर मंगलवार को पटना में भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी देखने को मिली। छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने राजभवन मार्च निकालकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की बात कही थी। इसके मद्देनजर शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा, एसपी वर्मा रोड और होटल मौर्य के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया था। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग स्थित निर्धारित स्थल का ही उपयोग किया जाए। प्रशासन के मुताबिक, तय जगह के अलावा शहर के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं से गांधी मैदान के पास पहुंचे। उन्होंने जेपी गोलंबर पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। यहां भी पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी उस पर चढ़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान लाठीचार्ज की आशंका बनी हुई थी।
मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
भाकपा-माले विधायक संदीप सौरभ ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में भी पक्षपात किया गया।
उनका दावा है कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर और वेबसाइट से जुड़ी प्रक्रिया को केंद्रीकृत किए जाने से स्थानीय अधिकारियों की भूमिका सीमित हो गई है। संदीप सौरभ ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। ये आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से लगाए गए हैं।
जीवित लोगों को मृत दिखाने का भी आरोप
आइसा की राज्य उपाध्यक्ष सवा ने कहा कि बिहार में सबसे पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया लागू की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कुछ मामलों में जीवित लोगों को मृत घोषित किए जाने का दावा भी किया।
सवा के अनुसार, संगठन की ओर से की गई जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें जीवित लोगों के नाम कथित तौर पर मृतकों की सूची में दर्ज थे। उन्होंने दावा किया कि इसके चलते संबंधित लोग मतदान करने से वंचित रह गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराई गई सामग्री में नहीं है।
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की तैयारी
आइसा की राज्य उपाध्यक्ष के मुताबिक, राजभवन मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल होगी। इसके अलावा एसआईआर को रद्द करने और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की जाएगी।
प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वे इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा सवाल बता रहे हैं।
प्रशासन ने यातायात और आम लोगों की परेशानी का दिया हवाला
इससे पहले पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा था कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात सुचारु रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग में स्थान निर्धारित किया गया है। तय जगह से बाहर प्रदर्शन होने पर सड़कों पर जाम लग सकता है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और न्यायालय जैसे संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं और एंबुलेंस सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही में बाधा आ सकती है। बुजुर्गों, बीमार लोगों और स्कूली बच्चों के आवागमन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। इसी वजह से प्रदर्शनकारियों से निर्धारित स्थल पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की गई थी।
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