शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में गिरफ्तार बलिया के राज सिंह रिहा

बलिया। शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ हत्याकांड से जुड़े मामले में शक के आधार पर पकड़े गए राज सिंह को आखिरकार रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद गुरुवार को उन्होंने मीडिया से बात करते हुए अपनी बात रखी और दावा किया कि यदि सीबीआई ने इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की होती, तो उनकी जान को भी खतरा हो सकता था और स्थिति किसी भी अनहोनी तक पहुंच सकती थी।
राज सिंह ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया, जिससे वह बेहद डरे हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें यह आशंका होने लगी थी कि कहीं उनके साथ कोई गंभीर घटना न हो जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार द्वारा जुटाए गए सबूत और उनकी लगातार पैरवी ने मामले की दिशा बदल दी, जिसके बाद उन्हें राहत मिली।
उनकी बहन दीपशिखा ने एक दिन पहले ही जानकारी दी थी कि अदालत ने राज को जमानत दे दी है। बताया गया कि कोलकाता की अदालत ने सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को देखते हुए यह माना कि घटना के समय राज सिंह बलिया में ही मौजूद थे। जांच एजेंसियों ने भी परिवार की ओर से दिए गए तथ्यों की पड़ताल की, जो सही पाए गए।
रिहाई के बाद राज अपने घर पहुंचे और भावुक होकर माता जामवंती से मिले। उन्होंने कहा कि अगर उनके परिवार द्वारा उपलब्ध कराया गया सीसीटीवी फुटेज न होता, तो उनका जीवन मुश्किल में पड़ सकता था।
राज ने यह भी बताया कि वह अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, पूर्वांचल प्रांत के प्रदेश सचिव हैं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि मुश्किल समय में संगठन ने उनका साथ नहीं दिया, जिससे वह पद छोड़ने पर भी विचार कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सच सामने आने पर उन्हें न्याय मिलेगा।
परिवार की ओर से बताया गया कि गिरफ्तारी से पहले राज ने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन किए थे। उनकी माता का कहना है कि उन्हें भगवान राम पर पूरा विश्वास था और उन्हीं की कृपा से उनका बेटा सुरक्षित वापस लौट सका।
गौरतलब है कि इस मामले में 10 मई को बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य को गिरफ्तार किया गया था। उनके इनपुट के आधार पर 11 मई को राज सिंह की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में 18 मई को बलिया के रसड़ा क्षेत्र के रतोपुर गांव निवासी राजकुमार सिंह को मुजफ्फरनगर से पकड़ा गया। दिलचस्प बात यह है कि कई दस्तावेजों में राजकुमार सिंह भी अपना नाम राज लिखता है, जिससे जांच में भ्रम की स्थिति बनी।
बताया जाता है कि दोनों की दाढ़ी और चेहरे की बनावट में समानता होने के कारण शुरुआती जांच में कड़ियां जोड़ने में दिक्कत हुई थी। रिहाई के बाद राज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने “जय श्रीराम” कहते हुए समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और मीडिया से बातचीत की बात कही। वीडियो में वह आत्मविश्वास से भरे नजर आए।
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