‘ताइवान कभी स्वतंत्र नहीं रहा, न रहेगा’: भारत में चीनी राजदूत का बयान

बीजिंग। चीन ने एक बार फिर ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा बताते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि इसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व कभी नहीं रहा और भविष्य में भी नहीं रहेगा। भारत में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि ताइवान का चीन का हिस्सा होना ऐतिहासिक और कानूनी रूप से पूरी तरह से प्रमाणित है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है और क्षेत्रीय तनाव अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का विषय बन गया है।
राजदूत फेइहोंग ने कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना 1949 में हुई थी और तब से यह पूरी तरह से चीन का कानूनी प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने दोहराया कि ताइवान कभी भी स्वतंत्र संप्रभु राज्य नहीं रहा और न भविष्य में रहेगा। उन्होंने कहा कि डीपीपी सरकार की कोई भी कार्रवाई चीन के पुनर्मिलन की ऐतिहासिक प्रक्रिया को रोक नहीं सकती।
हालिया सैन्य गतिविधियाँ
हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास चीनी सैन्य अभ्यास बढ़ गए हैं, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय यात्राओं के बाद। चीनी सेना ने जलडमरूमध्य में कई अभ्यास किए, जिन्हें ताइवान सरकार ने ‘उकसाने वाले’ करार दिया है। अमेरिका और अन्य देशों ने भी इन गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि ये अभ्यास ताइवान के प्रति उनके दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन 2027 तक ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करने और इसे जीतने की क्षमता विकसित कर लेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीजिंग जरूरत पड़ने पर अपने सीमाओं से 1500-2000 समुद्री मील दूर तक ‘क्रूर बल’ का उपयोग कर सकता है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ताइवान के पुनर्मिलन को अजेय बताया है, जबकि राजदूत ने जोर देकर कहा कि ताइवान हमेशा से चीन का अभिन्न हिस्सा रहा है और यह भविष्य में भी बनेगा।
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