कोलकाता में टीएमसी का पहला बड़ा धरना आधे घंटे में खत्म, नहीं पहुंचे 46 विधायक

HIGHLIGHTS
- कोलकाता में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
- हाल ही में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी ने बुधवार को विधानसभा परिसर में पहली बड़ी विपक्षी प्रदर्शन रैली आयोजित की, लेकिन यह आयोजन अपनी ही उपस्थिति को लेकर सवालों में घिर गया।
- नई भाजपा सरकार के खिलाफ कथित राजनीतिक हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और रेलवे क्षेत्रों से फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में डॉ.
- भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने धरना दिया गया।
- हालांकि, इस प्रदर्शन में पार्टी के 80…
कोलकाता में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी ने बुधवार को विधानसभा परिसर में पहली बड़ी विपक्षी प्रदर्शन रैली आयोजित की, लेकिन यह आयोजन अपनी ही उपस्थिति को लेकर सवालों में घिर गया।
नई भाजपा सरकार के खिलाफ कथित राजनीतिक हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और रेलवे क्षेत्रों से फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने धरना दिया गया। हालांकि, इस प्रदर्शन में पार्टी के 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से केवल 34 ही शामिल हुए, जबकि 46 विधायक अनुपस्थित रहे।
आधे घंटे में खत्म हुआ विरोध प्रदर्शन
कम उपस्थिति के कारण पार्टी का यह प्रदर्शन महज आधे घंटे में ही समाप्त हो गया। शुरुआत में केवल 31 विधायक मौजूद थे, बाद में तीन और विधायक जुड़ने के बाद संख्या 34 तक पहुंची।
धरना स्थल पर तृणमूल नेताओं ने “तृणमूल जिंदाबाद” और “ममता बनर्जी जिंदाबाद” के नारे लगाए, लेकिन “अभिषेक बनर्जी जिंदाबाद” के नारे न सुनाई देने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
प्रदर्शन में विधायक दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम और प्रवक्ता कुणाल घोष समेत कुछ वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।
बैठक से भी कई विधायक रहे दूर
सूत्रों के अनुसार, इससे एक दिन पहले कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई पार्टी बैठक में भी लगभग 15 विधायक अनुपस्थित रहे थे, जिससे संगठनात्मक असंतोष की चर्चा और तेज हो गई है।
अनुपस्थिति पर पार्टी का सफाई बयान
कुणाल घोष ने विधायकों की अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि चुनाव के बाद कई इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं, जिसके चलते कई विधायक अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ विधायक फैक्ट-फाइंडिंग टीमों के साथ जिलों के दौरे पर हैं।
राजनीतिक विश्लेषण और बढ़ती हलचल
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल यह कारण पूरी स्थिति को स्पष्ट नहीं करता। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कई TMC नेताओं पर कथित वसूली, सिंडिकेट गतिविधियों और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई तेज हुई है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और दबाव की स्थिति बढ़ती दिख रही है।
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