ट्रंप का बड़ा फैसला, 'बर्थ टूरिज्म' पर सख्ती; जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर नए आदेश जारी

HIGHLIGHTS
- व्हाइट हाउस ने जन्मसिद्ध नागरिकता के दुरुपयोग का दावा किया है।
- विशेषज्ञों ने नए आदेशों को 14वें संशोधन से जोड़कर संवैधानिक सवाल उठाए हैं।
- माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार हर साल हजारों बच्चों के जन्म को बर्थ टूरिज्म से जोड़ा जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता को सीमित करने और 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक लगाने के उद्देश्य से गुरुवार को दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ हफ्ते पहले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले आदेश को खारिज कर दिया था।
पहले आदेश का उद्देश्य क्या है?
पहले आदेश में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जो केवल अपने बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाने के उद्देश्य से वहां पहुंचते हैं। इसे 'बर्थ टूरिज्म' कहा जाता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोग पर्यटन वीजा का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाना होता है।
दूसरे आदेश में किन लोगों को शामिल किया गया?
दूसरे आदेश में उन श्रेणियों का विस्तार किया गया है, जिन्हें जन्म के आधार पर नागरिकता के लिए अयोग्य माना जा सकता है। इसमें विदेशी सरकारों के लिए काम करने वाले लोगों या उनकी ओर से लॉबिंग करने वालों के बच्चों समेत कुछ अन्य वर्गों को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले आदेश को किया था रद्द
30 जून को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि करीब 100 वर्षों से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोगों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है।
ट्रंप ने फैसले को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
ओवल ऑफिस में नए आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण था और उनकी सरकार अब इसमें जरूरी बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर आए फैसले में बदलाव की आवश्यकता है।
14वां संशोधन क्या प्रावधान करता है?
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन, जो 9 जुलाई 1868 को लागू हुआ था, अमेरिका में जन्म लेने वाले या नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों को अमेरिकी नागरिक मानता है। यह संशोधन गृहयुद्ध के बाद पूर्व गुलामों को नागरिकता देने के उद्देश्य से लाया गया था।
ट्रंप का कहना है कि यह कानून उस समय की जरूरतों के लिए बनाया गया था, लेकिन अब कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर 'बर्थ टूरिज्म' को बढ़ावा दे रहे हैं।
व्हाइट हाउस ने क्या तर्क दिया?
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि कई लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं, लेकिन उनका असली मकसद बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाना होता है ताकि बच्चे को स्वत: नागरिकता मिल सके। उनके अनुसार, इससे ऐसे परिवारों को भविष्य में सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और नागरिक अधिकारों तक पहुंच मिलती है।
किन लोगों के बच्चों पर पड़ सकता है असर?
नए आदेश के तहत कुछ श्रेणियों के लोगों के बच्चों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जारी करने पर रोक लगाने की बात कही गई है। इनमें शामिल हैं:
- बर्थ टूरिज्म के जरिए अमेरिका आने वाले लोगों के बच्चे।
- आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे।
- विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चे।
- कुछ अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे, जहां संघीय कानून के तहत स्वत: नागरिकता नहीं मिलती।
विशेषज्ञों ने उठाए संवैधानिक सवाल
आव्रजन कानून विशेषज्ञों ने ट्रंप के नए आदेशों का विरोध किया है। न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन वकील साइरस मेहता ने कहा कि यह आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक लेन-देन जैसी परिभाषा स्पष्ट नहीं है और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
वहीं, अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जन्मसिद्ध नागरिकता संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है। ऐसे में ट्रंप के नए आदेश को भी कानूनी चुनौती मिल सकती है।
बर्थ टूरिज्म को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार, हर साल अमेरिका में 'बर्थ टूरिज्म' के जरिए करीब 22 हजार से 26 हजार बच्चों के जन्म का अनुमान है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से अमेरिका में 9,600 बच्चों के जन्म दर्ज किए गए थे।
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