भारत के रूसी तेल आयात पर बोले ट्रंप, व्यापार संतुलन न बना तो बढ़ेंगे टैरिफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के रूस से तेल आयात पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे और यह समझना जरूरी है कि वे “अच्छे इंसान” हैं। वहीं, उन्होंने संकेत दिया कि अगर व्यापार संबंधों में संतुलन न बना तो अमेरिका जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है।
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात मात्रा और मूल्य दोनों के मामले में पिछले छह महीनों में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसी दौरान भारत ने अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाई, जो पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा रही। इस महीने भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35% तक पहुंच गई, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी 13% रही।
रूस से कितना तेल आया?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत ने रूस से 7.7 मिलियन टन तेल आयात किया। यह देश के कुल तेल आयात का 35.1% था और पिछले साल इसी महीने के मुकाबले लगभग 7% अधिक रहा। मूल्य के हिसाब से रूस से तेल का आयात $3.7 बिलियन रहा, जो देश के कुल तेल बिल का 34% है।
अमेरिका ने पहले बढ़ाया था टैरिफ
अमेरिका ने अगस्त 2025 में रूसी तेल के आयात पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया था। यह कदम ऐसे समय में लिया गया, जब भारत ने अधिकांश महीनों में रूसी तेल के आयात में कटौती की थी। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई, जिससे सरकार में निराशा बढ़ी।
भारत का संतुलित रवैया
हालांकि अमेरिका से निराशा रही, भारत ने अपने कदम संतुलित रखे। पिछले नवंबर में भारत ने अमेरिका से 2.8 मिलियन टन तेल आयात किया, जिसकी कुल कीमत $1.4 बिलियन थी। इस वजह से अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी भारतीय तेल आयात में 12.6% तक पहुंच गई, जो पिछले महीने 4.2% और एक साल पहले 5.1% थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह रणनीति अमेरिका और रूस दोनों के साथ संबंधों को संतुलित रखने का प्रयास है।
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