क्या कर्नाटक में होगा नेतृत्व परिवर्तन? कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी बहस

कर्नाटक कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व को लेकर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। केरल में वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या कर्नाटक में भी नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बन रही है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी दावेदारी को मजबूती से सामने रख रहे हैं।
शुक्रवार को डीके शिवकुमार के 64वें जन्मदिन पर उनके समर्थकों ने बेंगलुरु समेत पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर पोस्टर, बैनर और डिजिटल होर्डिंग्स लगाए। इनमें उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, लेकिन हाल ही में केरल में हुए नेतृत्व बदलाव के बाद शिवकुमार खेमे में नई उम्मीदें देखी जा रही हैं। वहीं 20 मई को कर्नाटक सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब यह मुद्दा लंबे समय तक टाला जाना मुश्किल हो सकता है। अधिवक्ता और राजनीतिक विश्लेषक हिदायतुल्ला कुवेंदा के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान के सामने अब स्पष्ट फैसला लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि सिद्धारमैया का अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन पार्टी को ऐसे नेतृत्व की भी जरूरत है जो राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों वर्गों को साध सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर डीके शिवकुमार को नेतृत्व सौंपा जाता है तो उनके पास अगली विधानसभा चुनाव से पहले पर्याप्त समय होगा, जिसमें वे अपनी कार्यशैली और सरकार के कामकाज को जनता के सामने रख सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों खेमे इस बात से वाकिफ हैं कि अगर समय रहते कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले चुनावों में यह मुद्दा और जटिल हो सकता है।
पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का मानना है कि यह अब केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि संगठनात्मक संतुलन और स्पष्टता का सवाल बन चुका है। शिवकुमार समर्थकों का तर्क है कि पार्टी में किए गए राजनीतिक समझौतों का सम्मान होना चाहिए, जबकि सिद्धारमैया समर्थक नेतृत्व परिवर्तन की किसी भी संभावना को फिलहाल खारिज कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक विश्वास शेट्टी का कहना है कि केरल और कर्नाटक की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। केरल में जहां चुनावी तैयारी के लिए नया चेहरा लाया गया है, वहीं कर्नाटक में कांग्रेस पहले से सत्ता में है, ऐसे में अचानक नेतृत्व परिवर्तन से प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि जब तक सिद्धारमैया स्वयं कोई निर्णय नहीं लेते, तब तक बदलाव की संभावना फिलहाल कमजोर है।
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