एमएसएमई निर्यातकों के लिए 7,295 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज और क्रेडिट गारंटी पैकेज

नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में अस्थिरता के बीच भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 7,295 करोड़ रुपये के व्यापक ‘एक्सपोर्ट सपोर्ट पैकेज’ की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों, खासकर एमएसएमई सेक्टर के लिए कर्ज की उपलब्धता को आसान और किफायती बनाना है।
योजना 2025-31 तक लागू
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह पैकेज अगले छह साल (2025-31) तक लागू रहेगा और इसके तहत निर्यातकों की ट्रेड फाइनेंस से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कुल 7,295 करोड़ रुपये के इस पैकेज को दो हिस्सों में बांटा गया है:
ब्याज सहायता योजना: 5,181 करोड़ रुपये
कोलेटरल सपोर्ट योजना: 2,114 करोड़ रुपये
ब्याज सहायता योजना – सस्ता कर्ज
ब्याज सहायता योजना के तहत पात्र एमएसएमई निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट क्रेडिट पर 2.75 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलेगी। हालांकि, प्रति फर्म सालाना लाभ की सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। इससे निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में किफायती दर पर कर्ज उपलब्ध होगा।
कोलेटरल सपोर्ट – बिना संपत्ति गिरवी कर्ज
2,114 करोड़ रुपये के कोलेटरल सपोर्ट के तहत निर्यातकों को वर्किंग कैपिटल लोन पर 10 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। इससे उन्हें अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखे बिना कर्ज लेने में मदद मिलेगी।
‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ का हिस्सा
यह योजना नवंबर 2025 में मंजूर 25,060 करोड़ रुपये के ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ का दूसरा प्रमुख घटक है। पहले चरण में 31 दिसंबर 2025 को 4,531 करोड़ रुपये का ‘मार्केट एक्सेस सपोर्ट’ लॉन्च किया गया था।
किन उत्पादों को मिलेगा लाभ?
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अनुसार, ब्याज सहायता और कोलेटरल सपोर्ट केवल चयनित ‘पॉजिटिव लिस्ट’ के उत्पादों पर लागू होगा। रक्षा उत्पाद और SCOMET आइटम योजना में शामिल होंगे, जबकि प्रतिबंधित वस्तुएं, वेस्ट/स्क्रैप और पीएलआई लाभार्थी उत्पाद इस योजना से बाहर रहेंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने बताया कि यह पैकेज निर्यातकों की वित्तीय बाधाओं को दूर करने में मदद करेगा। योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक और DGFT द्वारा जारी किए जाएंगे। आरबीआई इस योजना का कार्यान्वयन एजेंसी होगी।
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