आयकर और जीएसटी के बाद अब एसटीटी में कटौती की तैयारी

जैसे-जैसे Budget 2026 की तारीख नजदीक आ रही है, वित्तीय मामलों और कर नीतियों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों की मानें तो सरकार इस बार शेयर बाजार में निवेशकों और कारोबारियों को राहत देने की योजना पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके तहत कैश सेगमेंट में सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) कम करने पर विचार हो सकता है ताकि बाजार में फंड का स्थिर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
STT पर सरकार की योजना
सरकार संभावित कदमों के तहत शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में विकल्प तलाश रही है। सूत्रों के अनुसार, पेंशन और एंडॉमेंट फंड्स के निवेश पर टैक्स-फ्री स्टेट्स की भी संभावना पर विचार हो रहा है।
STT क्या है?
सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) एक प्रकार का डायरेक्ट टैक्स है, जो शेयरों की खरीद और बिक्री पर लागू होता है। इसे 2004 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य कैपिटल गेन टैक्स की चोरी रोकना और सरकारी खजाने में स्थिर टैक्स संग्रह सुनिश्चित करना है।
STT कैसे लगता है?
STT स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से ट्रेड के समय ही काट लिया जाता है। चाहे निवेशक को मुनाफा हो या नुकसान, इस टैक्स का भुगतान करना अनिवार्य है। यह टैक्स इक्विटी शेयरों के साथ-साथ फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेड्स पर भी लागू होता है।
STT की वर्तमान दरें
हालांकि समय-समय पर STT की दरों में बदलाव होता रहा है, 2023 में कुछ बढ़ोतरी के बाद अब तक इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। वर्तमान दरें इस प्रकार हैं:
-
इक्विटी शेयर (खरीद और बिक्री): 0.1%
-
फ्यूचर ट्रेड: कुल वैल्यू पर 0.02%
-
ऑप्शन ट्रेड: कुल वैल्यू पर 0.1%
विशेषज्ञों का कहना है कि STT में संभावित कटौती से न सिर्फ घरेलू निवेशकों को लाभ मिलेगा, बल्कि विदेशी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और बाजार में तरलता बढ़ेगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.