एआई समिट में 250 अरब डॉलर निवेश का ऐलान, 70+ देश ‘दिल्ली घोषणापत्र’ से जुड़े

नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई समिट’ ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से पेश किया है। केंद्र सरकार के अनुसार यह सम्मेलन केवल एक तकनीकी आयोजन नहीं, बल्कि देश के डिजिटल भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव बनकर उभरा है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।
‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर वैश्विक समर्थन
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण ‘दिल्ली घोषणापत्र’ रहा, जिस पर अब तक 70 देशों ने सहमति जताई है। मंत्री के मुताबिक, कई अन्य राष्ट्रों से भी बातचीत जारी है और समापन तक इस संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि इस दस्तावेज़ के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नीतियों में सहयोग और साझा मानकों की दिशा तय की जाएगी। घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं को समापन सत्र में सार्वजनिक करने की तैयारी है।
निवेश और भागीदारी से उत्साह
आयोजकों के अनुसार, समिट के दौरान डिजिटल और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इसे देश के टेक सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में आगंतुकों की मौजूदगी ने भी यह संकेत दिया कि नई तकनीकों को लेकर देश में व्यापक रुचि और जागरूकता बढ़ रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
कार्यक्रम के बीच विपक्ष की ओर से उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि इस तरह के प्रयासों से सम्मेलन की गति पर कोई असर नहीं पड़ा। उनका दावा है कि युवाओं और उद्योग जगत का समर्थन इस आयोजन की सफलता को दर्शाता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घोषित निवेश धरातल पर उतरता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होता है, तो भारत एआई और डिजिटल नीतियों के क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। समापन के साथ ही ‘दिल्ली घोषणापत्र’ की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भारत की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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