बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों को घसीटने और पत्रकारों को पीटने का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

HIGHLIGHTS
- बेंगलुरु में SIR के विरोध में मार्च निकालने के लिए छात्र, वकील और एक्टिविस्ट जुटे थे।
- प्रदर्शनकारियों ने SIR रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
- एक्टिविस्ट समूह ने पुलिस पर धक्का-मुक्की और महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचने का आरोप लगाया।
बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृहमंत्री प्रियांक खरगे सोमवार को दिल्ली में वोटर लिस्ट के SIR और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर विरोध जता रहे थे। वहीं, दूसरी ओर बेंगलुरु में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस कार्रवाई की कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ मारपीट किए जाने का भी मामला सामने आया है।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों पर मारपीट के आरोप
सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी SJP कॉलेज के बाहर प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते नजर आए। यह कॉलेज फ्रीडम पार्क से करीब एक किलोमीटर के दायरे में और मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के ठीक सामने स्थित है।
छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों समेत कई लोग मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय तक मार्च निकालने के लिए एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि SIR को रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचने का आरोप
एक्टिविस्ट समूह 'माई वोट, माई राइट' के अनुसार, मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया था। समूह ने आरोप लगाया कि मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने उनके प्लेकार्ड जब्त कर लिए और कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
समूह का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई, उन्हें घसीटा गया और जबरन बसों में बैठाया गया। समूह ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने युवा प्रदर्शनकारियों की पिटाई की और महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचे।
वकील विनय श्रीनिवासा ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लेने के बाद CAR ग्राउंड्स पर छोड़ दिया। इस दौरान 'ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस' के राष्ट्रीय महासचिव क्लिफ्टन रोजारियो के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
पुलिस कार्रवाई की कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी बनाया निशाना
प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे फोटो जर्नलिस्ट्स को भी कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। आरोप है कि चार पुलिसकर्मियों ने एक फोटो जर्नलिस्ट की पिटाई की, जबकि तीन अन्य पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई।
घटनास्थल पर मौजूद एक फोटो जर्नलिस्ट ने बताया कि पुलिस छात्रों के एक समूह के साथ मारपीट कर रही थी। जब पत्रकारों ने इस कार्रवाई को रिकॉर्ड करना शुरू किया, तो पुलिसकर्मियों ने इसका विरोध किया। रिकॉर्डिंग जारी रखने पर एक अधिकारी ने उनसे फुटेज डिलीट करने को कहा।
पत्रकार के मुताबिक, जब उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना रिकॉर्ड करना जारी रखा, तो पुलिसकर्मियों ने फिर आपत्ति जताई। आरोप है कि एक फोटो जर्नलिस्ट को धमकाने के साथ पीटा गया, जबकि दूसरे पत्रकार को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया गया।
पत्रकार ने बताया कि पुलिस ने उसका फोन छीनकर दूर फेंक दिया। इसके अलावा, उसका कॉलर खींचा गया, पीछे से धक्का दिया गया और पैर पर भी मारा गया। एक अधिकारी ने उसे जेल भेजने की धमकी भी दी।
पत्रकारों ने यह भी बताया कि प्रदर्शनस्थल पर महिला पुलिसकर्मियों की संख्या कम थी और पुरुष अधिकारी ही प्रदर्शनकारियों को संभाल रहे थे।
SIR के विरोध में क्यों जुटे थे प्रदर्शनकारी?
यह प्रदर्शन दिल्ली में SIR के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था। दिल्ली में SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, छात्रों और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था।
बेंगलुरु में पुलिस कार्रवाई की सोशल मीडिया पर आलोचना
बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। कई लोगों ने पोस्ट के जरिए बताया कि उनके परिवार के सदस्य भी पुलिस की कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए।
अशोका यूनिवर्सिटी में राइटिंग की एसोसिएट प्रोफेसर अर्पिता दास ने X पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे को टैग करते हुए लिखा, 'बेंगलुरु में SIR-विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने गई मेरी बेटी और उसकी दोस्त को अभी हिरासत में ले लिया गया है। कांग्रेस-शासित राज्य में ऐसा क्यों हो रहा है, जबकि युवा आपके मकसद के समर्थन में आगे आ रहे हैं? कृपया जवाब दें।'
प्रतीक वाघरे ने भी पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए कर्नाटक सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रियांक खरगे को टैग करते हुए लिखा, 'RSS के खिलाफ आपके तमाम बयानों के बावजूद आपकी पुलिस ऐसे काम कर रही है जैसे वह RSS से जुड़ी किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा चलाई जा रही हो।'
पुलिस ने क्या कहा?
DCP अक्षय एम. हकाय ने बताया कि KR सर्कल के पास बिना अनुमति एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने निर्देश का पालन नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
DCP ने कहा कि पुलिस ने संयम बरता। उनके मुताबिक, पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव तनावपूर्ण परिस्थितियों में अनजाने में हुआ।
बेंगलुरु सिटी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने और केवल फ्रीडम पार्क में ही प्रदर्शन करने की अपील की।
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