वैश्विक अनिश्चितता में भारत बना दक्षिण एशिया का विकास इंजन: डब्ल्यूईएफ

नई दिल्ली।विश्व आर्थिक मंच (WEF) की हालिया ‘चीफ इकोनॉमिस्ट आउटलुक’ रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को मिश्रित संकेत देते हुए प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां दुनिया भर के अधिकांश अर्थशास्त्री इस साल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कमजोरी की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं भारत के नेतृत्व में दक्षिण एशिया का क्षेत्र सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला आर्थिक केंद्र बनकर उभरा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और दावोस सर्वे का निष्कर्ष
दावोस में होने वाली वार्षिक बैठक से पहले जारी रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक आर्थिक ढांचे को नया आकार देने के प्रयास जारी हैं। बढ़ता कर्ज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से प्रसार विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता इसे अन्य उभरते क्षेत्रों से अलग खड़ा करती है।
सर्वे में शामिल लगभग 53% अर्थशास्त्रियों ने कहा कि आने वाले वर्ष में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कमजोर हो सकती हैं। इसके विपरीत, दक्षिण एशिया के लिए दृष्टिकोण काफी सकारात्मक है।
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दक्षिण एशिया की मजबूती: 60% अर्थशास्त्रियों ने इस क्षेत्र में ‘मजबूत’ और 6% ने ‘बेहद मजबूत’ विकास की उम्मीद जताई, जो पिछले साल के 31% अनुमान से दोगुना है।
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क्षेत्रीय तुलना: पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए 45% ने मजबूत विकास का अनुमान लगाया, अमेरिका के लिए मात्र 11% ने इसे सकारात्मक बताया। यूरोप की स्थिति सबसे कमजोर मानी गई, जहां 53% ने सुस्त विकास की चेतावनी दी।
भारत की 'गोल्डिलॉक्स' अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट में भारत को दक्षिण एशिया की आर्थिक स्थिरता का मुख्य आधार बताया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने ‘गोल्डिलॉक्स’ अर्थव्यवस्था का संतुलन बनाए रखा है, जहां न अधिक गर्मी है और न ठंडक। सितंबर तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8.2% रही, लगभग शून्य मुद्रास्फीति के साथ।
नियामक सुधारों, रोजगार प्रतिबंधों में कमी और अमेरिकी तकनीकी निवेश की बढ़त ने भारत की आर्थिक मजबूती को और बढ़ाया है। 85% विशेषज्ञों का मानना है कि राजकोषीय नीति में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, जबकि मुद्रास्फीति की दर दक्षिण एशिया में अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद जताई गई है।
एआई और वैश्विक आर्थिक रुझान
WEF ने 2026 के लिए तीन प्रमुख आर्थिक रुझानों की पहचान की है – एआई निवेश में तेजी, बढ़ता कर्ज और व्यापारिक पुनर्गठन।
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उत्पादकता में लाभ: आईटी, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य और खुदरा क्षेत्र एआई को तेजी से अपनाएंगे। 36% विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो वर्षों में एआई निवेश विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
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रोजगार पर असर: अल्पकालिक रूप में दो-तिहाई विशेषज्ञों ने मामूली नौकरी हानि की संभावना जताई है। दीर्घकालिक दृष्टिकोण में राय बंटी है, जहां 57% शुद्ध हानि और 32% नए व्यवसायों से लाभ देखते हैं।
क्रिप्टो और सोने का रुझान
सर्वे में 62% विशेषज्ञों ने क्रिप्टोकरेंसी के लिए निराशाजनक भविष्य बताया। वहीं, 54% अर्थशास्त्री मानते हैं कि सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
WEF की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी का कहना है कि सरकारों और कंपनियों को अनिश्चित वैश्विक माहौल में सतर्क और लचीला होना होगा। भारत ने जिस तरह से तकनीकी बदलावों और व्यापारिक चुनौतियों के बीच अपनी विकास दर बनाए रखी है, वह इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद ‘एंकर’ बनाती है।
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