मुरैना के 150 शिवभक्तों का जत्था पहुंचा मुजफ्फरनगर, सामूहिक कांवड़ यात्रा बनी आकर्षण

HIGHLIGHTS
- 8 जुलाई को गौमुख से गंगाजल लेकर निकला शिवभक्तों का दल रोजाना करीब 40 किलोमीटर पैदल चल रहा है।
- पिछले साल 30-40 श्रद्धालुओं के मुकाबले इस बार गांव से 150 लोग कांवड़ यात्रा में शामिल हुए।
- जत्थे में 6 से 7 महिला शिवभक्त भी शामिल हैं, जो पुरुष श्रद्धालुओं के साथ यात्रा पूरी कर रही हैं।
मुजफ्फरनगर में सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले का एक गांव अपनी सामूहिक आस्था और एकजुटता को लेकर चर्चा में है। गांव के 150 शिवभक्तों का जत्था गौमुख से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए शुक्रवार शाम करीब 5 बजे मुजफ्फरनगर के छपार पहुंचा।
एक साथ बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पहुंचने पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने इस अनोखी सामूहिक कांवड़ यात्रा को देखने के साथ इसकी तस्वीरें और वीडियो भी बनाए।
800 किलोमीटर से अधिक लंबी यात्रा
इस कांवड़ दल की खास बात यह है कि इसमें शामिल सभी 150 श्रद्धालु एक ही गांव के रहने वाले हैं और एक परिवार की तरह मिलकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने 8 जुलाई को उत्तराखंड के गौमुख से गंगाजल उठाया था। गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें 800 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी है। यात्रा पूरी होने में अभी करीब 10 दिन और लगने की संभावना है। पूरा जत्था रोजाना औसतन 40 किलोमीटर पैदल सफर कर रहा है।
इस बार बढ़ा शिवभक्ति का उत्साह
श्रद्धालुओं के मुताबिक, पिछले साल गांव से 30 से 40 लोग ही सामूहिक रूप से कांवड़ यात्रा पर निकले थे, लेकिन इस बार भगवान शिव के प्रति आस्था और उत्साह के चलते यह संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच गई।
इस जत्थे में 6 से 7 महिला शिवभक्त भी शामिल हैं, जो पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ पुरुष श्रद्धालुओं के साथ कदम मिलाकर यात्रा कर रही हैं।
'बाबा का बुलावा आया, पूरा गांव साथ निकल पड़ा'
एक शिवभक्त ने बताया कि इस यात्रा के लिए किसी तरह का विशेष प्रचार या आयोजन नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “जिसे बाबा भोलेनाथ का बुलावा आता है, वही कांवड़ लेकर निकलता है। इस बार पूरे गांव ने एक साथ संकल्प लिया और सभी लोग एक परिवार की तरह यात्रा पर निकल पड़े। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
छपार में हुआ भव्य स्वागत
मुजफ्फरनगर पहुंचने पर विभिन्न कांवड़ सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। शिविरों में उन्हें जलपान, भोजन और विश्राम की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष के बीच जब यह विशाल कांवड़ जत्था छपार से गुजरा तो स्थानीय लोग इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच गए। कई लोगों ने इस सामूहिक कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किए।
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