बीमार हथिनी माया की मदद को आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए वनतारा एयरलिफ्ट

HIGHLIGHTS
- 5 नवंबर को उसे बेहतर इलाज के लिए वनतारा भेजने का फैसला लिया गया।
- जामनगर में माया को आधुनिक चिकित्सा जांच, दर्द से राहत और हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिस्टम की सुविधा मिलेगी।
- केरल वन विभाग के अधिकारी और उसका परिचित देखभालकर्ता भी उसके साथ वनतारा पहुंचे हैं।
जामनगर। केरल के अभयारण्यम में रह रही 18 महीने की अनाथ और गंभीर रूप से बीमार हथिनी माया को बेहतर इलाज के लिए जामनगर स्थित अनंत अंबानी के वनतारा लाया गया है। उसे एयरलिफ्ट के जरिए यहां पहुंचाया गया। जुलाई में गिरने के बाद से माया अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही है। उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे दया-मृत्यु (यूथेनेशिया) से बचाने और इलाज की संभावनाएं तलाशने के लिए यह कदम उठाया गया है।
केरल के अधिकारियों ने माया के उपचार के लिए वनतारा से सहायता मांगी थी, ताकि उसकी जान बचाने के लिए उपलब्ध सभी चिकित्सा विकल्पों पर काम किया जा सके। इसके बाद उसे बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वनतारा भेजने का फैसला लिया गया।
बेहतर इलाज के लिए वनतारा पहुंची माया
माया 19 अप्रैल 2025 को मलायात्तूर डिवीजन के काप्रिक्काड के पास नवजात अवस्था में अकेली मिली थी। उस समय वह गंभीर रूप से डिहाइड्रेटेड थी। इसके बाद उसे बचाकर अभयारण्यम लाया गया, जहां केरल वन विभाग की टीम ने उसकी देखभाल की। हालांकि, कुछ समय बाद उसकी परेशानियां और बढ़ गईं।
2 जुलाई 2026 को खेलते समय फिसलकर गिरने से माया के दाहिने कंधे में चोट लग गई। उसे फिजियोथेरेपी और जरूरी सप्लीमेंट्स दिए गए, लेकिन उसकी सेहत में सुधार होने के बजाय स्थिति लगातार बिगड़ती गई। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक वह अपने पैरों पर खड़ी होने में भी असमर्थ हो गई थी। इस दौरान वह केवल तरल आहार ही ले पा रही थी।
मेडिकल जांच में उसके अंगों में कई फ्रैक्चर, छाती में संक्रमण और हड्डियों की अत्यधिक कमजोरी सामने आई। उसकी नाजुक हड्डियों और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल बोर्ड ने 29 अक्टूबर को उसे आगे होने वाली तकलीफ से बचाने के लिए यूथेनेशिया की सिफारिश की थी।
दया-मृत्यु की सिफारिश के बाद इलाज की नई उम्मीद
माया के मामले में दूसरी चिकित्सकीय राय मिलने के बाद उसके उपचार की नई उम्मीद जगी। केरल के मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. पी. पुगाझेंडी ने किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञों से अतिरिक्त राय लेने का फैसला किया।
वीडियो कंसल्टेशन के दौरान वनतारा के पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने माया के एक्स-रे और ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट का अध्ययन किया। इस जांच में उन्हें पैराथायरॉइड से संबंधित एक ऐसी समस्या का पता चला, जिसका इलाज संभव है।
इसके बाद 5 नवंबर को सर्वसम्मति से माया को वनतारा भेजने का निर्णय लिया गया। यहां उसे दर्द से राहत देने के लिए उचित देखभाल, आधुनिक चिकित्सा जांच और सुरक्षित स्थिति में रखने के लिए हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिस्टम की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इस पहल के जरिए वनतारा ने अनंत अंबानी के उस सिद्धांत को आगे बढ़ाया है, जिसमें हर जीवन को महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पहल 'जीव सेवा' की भावना से प्रेरित है।
माया की देखभाल के लिए तैयार की गई विशेष व्यवस्था
माया को इलाज के दौरान शारीरिक देखभाल के साथ-साथ भावनात्मक सुरक्षा देना भी इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसके लिए वनतारा ने पहले से उपचार की योजना तैयार की और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से लैस एयरलिफ्ट की व्यवस्था की।
नए माहौल में माया को असहजता न हो और वह खुद को सुरक्षित महसूस करे, इसके लिए केरल वन विभाग ने सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनॉय सी. बाबू और उसके परिचित देखभालकर्ता श्री निखिल बाबू को भी उसके साथ भेजा है।
वनतारा में उपचार के दौरान भी निखिल बाबू उसके साथ रहेंगे। इससे माया को अपने परिचित देखभालकर्ता का साथ मिलता रहेगा और उसकी देखभाल में निरंतरता बनी रहेगी।
इलाज पर नजर रखेगी केरल की निगरानी समिति
माया के उपचार की पूरी प्रक्रिया पर केरल की एक निगरानी समिति नजर रखेगी। उसकी सेहत और इलाज में हो रही प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। उपचार पूरा होने के बाद वनतारा की ओर से उसे वापस उसके घर अभयारण्यम पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
फिलहाल माया की सेहत को लेकर किसी तरह की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। उसका ठीक होना अभी भी एक चुनौती है। हालांकि, केरल वन विभाग और वनतारा के संयुक्त प्रयासों के साथ विशेषज्ञों की देखरेख में उसे बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है, ताकि उसे स्वस्थ होने का हर संभव अवसर मिल सके।
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