90 साल की उम्र में दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी, लॉस एंजिल्स में रचा नया इतिहास

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा ने 90 वर्ष की उम्र में अपनी उपलब्धियों की सूची में एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान जोड़ लिया है। अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी अवॉर्ड समारोह में उन्होंने अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार हासिल किया।
दलाई लामा को यह सम्मान उनके स्पोकन-वर्ड एल्बम ‘Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama’ के लिए दिया गया। यह अवॉर्ड उन्हें बेस्ट ऑडियो बुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग श्रेणी में मिला।
रूफस वेनराइट ने मंच पर ग्रहण किया पुरस्कार
इस एल्बम के निर्माण में दलाई लामा के साथ काम करने वाले प्रसिद्ध संगीतकार रूफस वेनराइट ने समारोह में उनकी ओर से यह अवॉर्ड प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
एल्बम में दलाई लामा के करुणा, शांति, जागरूकता और मानवता की एकता से जुड़े विचारों को संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने योगदान दिया है और इसकी संगीतात्मक शैली भारतीय शास्त्रीय परंपरा से प्रेरित है।
दलाई लामा की प्रतिक्रिया
दलाई लामा के कार्यालय द्वारा जारी बयान में उन्होंने कहा कि वे इस ग्रैमी को किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि मानवता की साझा जिम्मेदारी की पहचान मानते हैं।
उन्होंने कहा,
"मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। शांति, करुणा, प्रकृति की रक्षा और इंसानों की एकता — ये सभी आठ अरब लोगों की सामूहिक भलाई के लिए जरूरी हैं। मुझे खुशी है कि यह ग्रैमी इन संदेशों को और आगे तक पहुंचाने में मदद करेगा।"
सम्मानों से भरा रहा है सफर
हालांकि यह दलाई लामा का पहला ग्रैमी अवॉर्ड है, लेकिन सम्मान उनके जीवन का नया अध्याय नहीं है। वे दशकों से शांति, अहिंसा और वैश्विक भाईचारे के लिए किए गए प्रयासों के लिए दुनिया भर में सराहे जाते रहे हैं।
साल 1989 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए उनके अहिंसक संघर्ष और वैश्विक शांति के प्रयासों की मान्यता था।
इसके अलावा, उन्हें 2012 में टेम्पलटन प्राइज भी मिला, जो धर्म और मानव कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया जाता है।
दुनिया भर से मिली पहचान
दलाई लामा को कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने डॉक्टर होनोरिस कॉसा की उपाधियां दी हैं।
उन्हें अमेरिका में लिबर्टी मेडल और भारत में सैयदना कुतुबुद्दीन हार्मनी अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं, जो उनके अंतर-धार्मिक संवाद और वैश्विक सद्भाव के प्रयासों को दर्शाते हैं।
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