बांग्लादेश: तस्लीमा नसरीन बोलीं- जमात-ए-इस्लामी लोकतंत्र के लिए खतरा

नई दिल्ली: मशहूर लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में हाल ही हुए चुनाव को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी और झड़पों की घटनाएं हुईं, लेकिन अधिकांश जगह वोटिंग शांतिपूर्ण रही।
तस्लीमा ने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के एक्टिविस्ट्स ने कुछ पोलिंग स्टेशनों पर स्वयं वोट डाला और पार्टी के एक नेता को 74 लाख टका कैश के साथ पकड़ा गया। उन पर पैसे बांटकर वोट खरीदने और धर्म के नाम पर प्रचार करने का आरोप है। नसरीन ने बताया कि जमात का प्रचारक दावा कर रहे हैं कि उनके चुनाव निशान “तराजू” पर वोट देने से जन्नत मिलेगी और यह अल्लाह का आदेश है।
जमात-ए-इस्लामी को लेकर चेतावनी
लेखिका ने चेताया कि अगर जमात सत्ता में आती है तो बांग्लादेश में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा और कट्टरपंथ हावी होगा। उनका कहना है कि इससे अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ेंगे और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। महिलाओं पर दबाव बढ़ेगा और उन्हें बुर्के और नकाब के पीछे सीमित कर दिया जाएगा। तस्लीमा ने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए डर जताया कि बांग्लादेश भी उसी राह पर जा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि 1971 के युद्ध के दौरान जमात ने पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था और यह ताकतें भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक हैं। हालांकि, उनका मानना है कि जमात इस बार भी चुनाव जीतने में सफल नहीं होगी।
बीएनपी पर तस्लीमा की राय
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के बारे में तस्लीमा ने कहा कि अगर यह पार्टी सत्ता में आती है तो उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। सरकार को लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और बोलने की स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं की बराबरी, मानवाधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को कम करना और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बीएनपी की प्राथमिकता होनी चाहिए। तस्लीमा का मानना है कि अगर बीएनपी इन मुद्दों पर ईमानदारी से काम करती है तो जनता का भरोसा हासिल कर सकती है।
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