बैंकों की वेबसाइट के बदले URL, अब ‘.bank.in’ डोमेन पर होंगी ऑनलाइन सेवाएं

नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों — स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक — ने अपनी नेट बैंकिंग वेबसाइटों के पते (URL) बदल दिए हैं। यह बदलाव भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उस निर्देश के तहत किया गया है, जिसके अनुसार सभी बैंकों को अपनी ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं को ‘.bank.in’ डोमेन पर स्थानांतरित करना अनिवार्य है।
आरबीआई ने 21 अप्रैल 2025 को जारी अपने सर्कुलर में कहा था कि सभी बैंक 31 अक्टूबर 2025 तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लें। नियामक संस्था का मानना है कि यह कदम ऑनलाइन बैंकिंग को अधिक सुरक्षित बनाने और डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।
क्यों बदले गए बैंक डोमेन
आरबीआई के अनुसार, नया ‘.bank.in’ डोमेन विशेष रूप से भारतीय बैंकों के लिए सुरक्षित इंटरनेट प्लेटफॉर्म है। इससे उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वे किसी असुरक्षित या फर्जी वेबसाइट पर नहीं, बल्कि अपने वास्तविक बैंक के प्लेटफॉर्म पर लॉग इन कर रहे हैं।
प्रमुख बैंकों के नए URL
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – https://sbi.bank.in
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पंजाब नेशनल बैंक (PNB) – https://pnb.bank.in
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एचडीएफसी बैंक (HDFC) – https://www.hdfc.bank.in
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आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) – https://www.icici.bank.in
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एक्सिस बैंक (Axis Bank) – https://www.axis.bank.in
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कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) – https://www.kotak.bank.in/en/home.html
ग्राहकों की सेवाओं पर कोई असर नहीं
बैंकों ने अपने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि इस परिवर्तन से उनकी मौजूदा ऑनलाइन सेवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पुराने लिंक स्वतः नए ‘.bank.in’ डोमेन पर रीडायरेक्ट होंगे और नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग व पेमेंट सेवाएं पहले की तरह सुचारू रूप से जारी रहेंगी।
आरबीआई की पहल का उद्देश्य
यह पहल भारतीय रिज़र्व बैंक के साइबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण अभियान का हिस्सा है। इसमें नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से बैंकिंग प्रौद्योगिकी विकास एवं अनुसंधान संस्थान (IDRBT) को डोमेन रजिस्ट्रेशन और संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
आरबीआई का कहना है कि यह बदलाव न केवल ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग वातावरण प्रदान करेगा, बल्कि इंटरनेट पर फर्जी बैंक वेबसाइटों और फिशिंग हमलों की संभावना को भी काफी हद तक कम करेगा।
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