बैंकिंग सेक्टर में बड़ा झटका: आईसीआईसीआई को 768 करोड़ रुपये का जीएसटी नोटिस

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के अग्रणी बैंकों में से एक आईसीआईसीआई बैंक को कर अधिकारियों की ओर से 768.6 करोड़ रुपये का भारी GST नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस उन सेवाओं से जुड़ा है जो बैंक अपने खाताधारकों को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने पर प्रदान करता है।
बैंक ने गुरुवार को नियामक फाइलिंग के जरिए इस मामले की जानकारी साझा की। मामले के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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नोटिस प्राप्ति की तिथि और प्राधिकारी: बैंक को यह नोटिस 18 मार्च, 2026 को प्राप्त हुआ। इसे सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, मुंबई पूर्व आयुक्तालय के अतिरिक्त आयुक्त ने जारी किया है।
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कानूनी आधार: यह नोटिस महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है।
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जुर्माने की राशि: कर अधिकारियों ने 384.33 करोड़ रुपये की मूल GST राशि तय की है। इसमें नियमों के अनुसार समान राशि का जुर्माना और ब्याज जोड़ने के बाद कुल नोटिस की रकम 768.6 करोड़ रुपये हो गई है।
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कर संबंधित सेवा: यह नोटिस विशेष रूप से उन सेवाओं पर लागू किया गया है जो बैंक अपने ग्राहकों को उनके खातों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने पर देता है।
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बैंक की प्रतिक्रिया: इतने बड़े नोटिस के बाद बैंक ने साफ किया है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर कानूनी माध्यमों से इसका विरोध करेगा।
बैंक ने फाइलिंग में कहा कि पहले भी ऐसे मुद्दों पर उन्हें “कारण बताओ नोटिस (SCN)” या अन्य आदेशों के खिलाफ मुकदमेबाजी करनी पड़ी है। वर्तमान नोटिस की राशि उनकी भौतिकता सीमा से अधिक होने के कारण इसे सार्वजनिक रूप से साझा किया जा रहा है। बैंक ने यह भी कहा कि वह रिट याचिका या अपील दायर करके अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम बैंकिंग क्षेत्र में सेवाओं पर कर अनुपालन की कड़ी निगरानी को दर्शाता है। न्यूनतम बैलेंस से जुड़ी सेवाओं पर GST की गणना अब बड़ा विवादित मुद्दा बन गई है। आने वाले समय में बाजार और निवेशक इस पर नजर बनाए रखेंगे कि आईसीआईसीआई बैंक इस 768.6 करोड़ रुपये के नोटिस से कैसे निपटता है।
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