वोडा-आइडिया को केंद्र से बड़ी राहत, ₹87,695 करोड़ का एजीआर बकाया फ्रीज

नई दिल्ली। कर्ज संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया को केंद्र सरकार से बड़ी राहत मिली है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक विशेष पैकेज को मंजूरी देते हुए कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) से जुड़े बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर करने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम न सिर्फ टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि इसमें सरकार की कंपनी में मौजूद हिस्सेदारी के संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है।
भुगतान में लंबी मोहलत
कैबिनेट के फैसले के तहत वोडाफोन-आइडिया को फिलहाल इस राशि का तत्काल भुगतान नहीं करना होगा। तय किए गए नए शेड्यूल के अनुसार, फ्रीज किए गए AGR बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 से शुरू होकर 2040-41 तक किया जाएगा। यह राशि 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के आधार पर तय की गई है।
दूरसंचार विभाग (DoT) बकाये की गणना की दोबारा जांच करेगा ताकि आंकड़ों में किसी तरह की त्रुटि न रहे। हालांकि, राहत पैकेज के बावजूद कंपनी को वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से जुड़े AGR बकाये का भुगतान पहले से तय समयसीमा के अनुसार करना होगा। यह भुगतान वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच किस्तों में किया जाएगा।
सरकार की हिस्सेदारी और बाजार संतुलन
फिलहाल केंद्र सरकार वोडाफोन-आइडिया की सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला इसलिए भी अहम है ताकि भारतीय टेलीकॉम बाजार में केवल दो कंपनियों का वर्चस्व न बन जाए। साथ ही, इससे कंपनी को नेटवर्क विस्तार, 5G सेवाओं की शुरुआत और तकनीकी उन्नयन के लिए पूंजी जुटाने में राहत मिलने की उम्मीद है।
संकट के दौर में फैसला
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब वोडाफोन-आइडिया लंबे समय से वित्तीय दबाव और ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रही है। अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने AGR बकाये के पुनर्मूल्यांकन को सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में बताया था, जिसके बाद से किसी राहत पैकेज की संभावना जताई जा रही थी।
आगे की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि बकाये के भुगतान में लंबी अवधि की राहत मिलने से कंपनी के नकदी प्रवाह में सुधार होगा। हालांकि, वोडाफोन-आइडिया की दीर्घकालिक मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि वह नए निवेश कितनी तेजी से जुटा पाती है और प्रति ग्राहक औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने में कितनी सफल होती है।
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