पीएम मोदी की अपील के बाद ज्वेलरी और तेल उद्योग में हलचल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों से सुरक्षित रखने के लिए कई अहम अपीलें कीं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, एक साल तक सोने की खरीद से बचने, रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक विकल्प अपनाने, खाद्य तेल का उपयोग सीमित करने और अनावश्यक विदेश यात्राओं पर रोक लगाने की सलाह दी।
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत के आयात बिल में इन दोनों वस्तुओं का बड़ा हिस्सा होने के चलते विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा है।
बाजार और कारोबार पर असर
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद सोमवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सर्राफा कारोबारियों और व्यापारिक संगठनों की ओर से इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं, खाद्य तेल की कीमतें पहले से ऊंची होने के कारण इसकी मांग में भी करीब 10 प्रतिशत तक की कमी देखी जा रही है, जिससे आने वाले समय में कारोबार पर और दबाव बढ़ सकता है।
ज्वेलरी उद्योग की चिंता
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, इस अपील का असर सोने की मांग पर लगभग 5 प्रतिशत तक पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से ही ऊंची कीमतों के कारण बाजार में मांग कमजोर है और अब सरकारी संदेश के बाद बैंकिंग फाइनेंसिंग पर भी असर पड़ सकता है।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने चिंता जताते हुए कहा कि इस फैसले से ज्वेलरी और बुलियन सेक्टर से जुड़े करीब 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उद्योग पहले ही भारी दबाव में है और नई अपील से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मुंबई होलसेल गोल्ड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बाफना ने सुझाव दिया कि यदि सरकार रिसाइक्लिंग और पुराने सोने के उपयोग को बढ़ावा देती तो उद्योग को कुछ राहत मिल सकती थी। वहीं, बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के प्रवक्ता कुमार जैन ने कहा कि छोटे कारोबारियों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा, जबकि बड़े ब्रांड अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेंगे।
खाद्य तेल बाजार में पहले से दबाव
खाद्य तेल क्षेत्र के जानकार शंकर ठक्कर के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी और गर्मी के चलते पहले से ही मांग में 10 से 12 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। वैश्विक तनाव और टैरिफ नीतियों के कारण भी तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे उपभोक्ता मांग प्रभावित हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 60 से 65 प्रतिशत आयात करता है। हाल के महीनों में आयात में लगातार गिरावट भी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों की राय
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करना है। हालांकि, इसका अल्पकालिक असर आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता मांग पर पड़ सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि यह कदम संकट प्रबंधन की दिशा में एक प्रयास है, जिसका असर आने वाले समय में आर्थिक विकास की गति पर थोड़ा नकारात्मक हो सकता है।
भारत में सोने की खपत और आयात
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है, जहां सालाना लगभग 700–800 टन सोने का आयात होता है। बढ़ती कीमतों के साथ यह आयात बिल और भी बढ़ गया है। हाल के वर्षों में सोने के आयात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश का व्यापार घाटा भी बढ़ा है।
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