सोनम वांगचुक के बयानों से लद्दाख में तनाव की आशंका: केंद्र

केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बयानों से लद्दाख में अशांति फैलने और हिंसक हालात बनने का खतरा पैदा हो गया था। सरकार ने कहा कि वांगचुक की भाषा और अंदाज़ से अलगाववादी सोच झलकती है, जिससे युवाओं को उकसाने की आशंका बनी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वांगचुक की एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध किया। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की ओर से दाखिल की गई है।
सरकार का आरोप: ‘हम और वे’ जैसी भाषा से पैदा हुई दूरी
सरकार की ओर से कहा गया कि वांगचुक बार-बार केंद्र सरकार के लिए ‘वे’ शब्द का इस्तेमाल करते रहे, जिससे ‘हम बनाम वे’ की सोच सामने आती है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भारत में ऐसा विभाजन स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि सभी नागरिक एक ही देश का हिस्सा हैं।
मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक अपने भाषणों में महात्मा गांधी का उल्लेख जरूर करते हैं, लेकिन उनके बीच-बीच में ऐसी बातें होती हैं जो युवाओं को टकराव और अस्थिरता की ओर धकेल सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक ने नेपाल और अरब देशों के आंदोलनों का उदाहरण देते हुए आत्मदाह जैसी घटनाओं का ज़िक्र किया, जिससे हालात बिगड़ने की आशंका बनी।
लद्दाख की संवेदनशीलता पर जोर
केंद्र ने यह भी रेखांकित किया कि लद्दाख एक सीमावर्ती इलाका है, जो सशस्त्र बलों की आपूर्ति और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। सरकार के अनुसार, जनमत संग्रह जैसे विचारों का प्रचार इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
इससे पहले, वांगचुक की ओर से अदालत में कहा गया था कि सरकार की आलोचना करना और आंदोलन करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ना गलत है। मामले पर आगे की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.