लक्ष्मीर भंडार योजना में गड़बड़ी के दावे, जांच के लिए एसआईटी गठित

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए चलाई जा रही ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना एक बड़े विवाद में घिर गई है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जी खाते बनाए गए और सरकारी धन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी ताकि गड़बड़ी की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
30 लाख फर्जी खातों का दावा, मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
नबान्न सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रारंभिक जांच में लगभग 30 लाख फर्जी खाते पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार के अनुसार कई ऐसे लाभार्थी भी योजना का लाभ उठा रहे थे जो इसके लिए पात्र नहीं थे। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में पुरुषों के नाम पर भी इस महिला केंद्रित योजना का लाभ लिया गया।
पुरुषों द्वारा लाभ लेने के आरोप, कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं
मुख्यमंत्री के मुताबिक जांच में सामने आया है कि कई पुरुषों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर योजना का लाभ उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है।
सरकार का आरोप है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में इस योजना में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिनकी अब विस्तृत जांच की जाएगी।
SIT जांच में बैंक रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन पर फोकस
सरकार ने बताया कि SIT की जांच सिर्फ फर्जी खातों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि सरकारी धन किन खातों में गया और आगे कैसे निकाला गया।
आशंका जताई जा रही है कि कई खातों के जरिए अवैध लेन-देन किया गया। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन डेटा की भी गहन जांच करेंगी।
सरकार के दावे और जांच के मुख्य बिंदु
- फर्जी खाते: करीब 30 लाख का अनुमान
- गलत लाभार्थी: पुरुषों के नाम पर भुगतान का आरोप
- मनी लॉन्ड्रिंग: अवैध ट्रांसफर की आशंका
- कार्रवाई: कुछ लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि
नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना पर भी सवाल
मुख्यमंत्री ने नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इस योजना के लिए 12 पन्नों के सत्यापन फॉर्म को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
हालांकि सरकार का कहना है कि पिछली अनियमितताओं को देखते हुए सख्त सत्यापन प्रक्रिया जरूरी है, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों तक ही सहायता पहुंचे।
आगे की कार्रवाई पर नजर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गलत तरीके से लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
इस पूरे मामले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सरकार इसे बड़े भ्रष्टाचार का मामला बता रही है, जबकि विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से जोड़ सकता है। अब सभी की नजर SIT जांच की रिपोर्ट पर टिकी है।
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