भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का वार, कहा- ये डील नहीं देश के लिए परेशानी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए बड़े पैमाने के वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए कहा कि इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार सीधे राष्ट्रपति को नहीं है। इस फैसले के बाद भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई, खासकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
कांग्रेस का आरोप: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता नुकसानदेह
कांग्रेस ने कहा कि हाल में किया गया अंतरिम व्यापार समझौता भारत के लिए परेशानी साबित हो रहा है। पार्टी का कहना है कि यह समझौता जल्दबाजी में और दबाव में किया गया, और यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करती, तो भारत को एकतरफा शर्तों का सामना नहीं करना पड़ता।
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दबाव और अपनी छवि बचाने के लिए यह समझौता फौरन किया। पार्टी का दावा है कि इससे भारतीय किसानों और देश के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। कांग्रेस ने अमेरिकी न्याय व्यवस्था की स्पष्टता की भी सराहना की।
जयराम रमेश के गंभीर सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2026 की रात अचानक अमेरिका द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि उसी दिन दोपहर को संसद में क्या हुआ था, जिससे व्हाइट हाउस से यह घोषणा करनी पड़ी। उनके अनुसार, यह समझौता भारत के किसानों और देश की संप्रभुता के लिए हानिकारक है।
ट्रंप का बयान और भारत पर टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रम्प ने कहा कि भारत के साथ व्यापार डील जारी रहेगी और कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीद में कमी की है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया।
कांग्रेस की सलाह
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि अंतरिम व्यापार समझौते को फिलहाल रोक दिया जाए और डील की शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए। जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट जवाब मिलने तक कोई इंपोर्ट लिबरलाइजेशन नहीं होगा और भारतीय किसानों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
समझौते की मुख्य शर्तें
अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत अमेरिका अब भारत से आयात पर 18 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा। इससे पहले रूस से तेल खरीद के कारण यह शुल्क 25 प्रतिशत था। ट्रंप ने दावा किया कि टैरिफ के जरिए भारत-पाकिस्तान संबंधों को भी नियंत्रित किया गया। कांग्रेस ने इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी बताया। फिलहाल यह मुद्दा संसद और सियासी गलियारों में गर्म बना हुआ है।
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