ईरान बंदरगाह नाकाबंदी की घोषणा से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अमेरिका की ओर से ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू करने की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में तेज हलचल देखी जा रही है। सोमवार से लागू होने वाली इस संभावित कार्रवाई की खबर के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी क्रूड ऑयल करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 102.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पहले से ही तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाद में बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच शुक्रवार को जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड की कीमत में मामूली गिरावट आई थी और यह 95.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था।
इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और दुनिया के कुल व्यापारिक तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों के लिए यह मार्ग बेहद जरूरी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, प्रस्तावित नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू की जाएगी। हालांकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को सामान्य रूप से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।
इस तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। युद्धविराम के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित रही है। मरीन ट्रैकिंग एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में करीब 40 से अधिक वाणिज्यिक जहाज इस मार्ग से गुजरे हैं, लेकिन नाकाबंदी की घोषणा के बाद जहाजों की आवाजाही पर और असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकती है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कई देशों की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ने की संभावना है। खासकर भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल इस फैसले के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.