मुजफ्फरनगर: सभासद देवेश कौशिक के प्रयासों से नगर पालिका में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद में वाहन पार्किंग ठेके को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेका आवंटित किया गया, जिसके बाद ठेकेदार लगभग 24 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में टाउन हॉल स्थित वाहन पार्किंग का ठेका कृष्णापुरी निवासी सुनील कुमार के नाम 24 लाख रुपये में छोड़ा गया था। ठेका प्रक्रिया के दौरान ठेकेदार ने हैसियत प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र सहित कई दस्तावेज जमा किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसे ठेका आवंटित किया गया।
हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि दस्तावेजों का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया था। टैक्स विभाग के लाइसेंस लिपिक प्रवीण कुमार पर आरोप है कि उन्होंने न तो दस्तावेजों की पूरी जांच की और न ही राजस्व की वसूली सुनिश्चित की। इसी लापरवाही के चलते नगर पालिका को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मामला सामने आने के बाद सभासद देवेश कौशिक ने इसकी शिकायत तत्कालीन ईओ और जिलाधिकारी से की थी। इसके बाद डीएम ने जांच के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी और एडीएम न्यायिक की संयुक्त समिति गठित की। जांच में लिपिक की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
तत्कालीन अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह की जांच रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि ठेकेदार द्वारा दिए गए पते की पुष्टि नहीं हो सकी। जिस पते को सुनील कुमार का बताया गया था, वह वास्तव में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज पाया गया। इसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि ठेका फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया गया था।
ईओ ने अपनी रिपोर्ट में लाइसेंस लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए फाइल नगर पालिका अध्यक्ष को भेजी थी, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

उधर, नगर पालिका को हुए करीब 24 लाख रुपये के नुकसान की वसूली भी संबंधित लिपिक से करने की सिफारिश की गई है। वहीं, इस मामले में कर अधीक्षक और अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।
नगर पालिका में सामने आए इस प्रकरण ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।
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